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रिक्शा चलाकर पिता ने की जी तोड़ मेहनत, बेटे को बनाया IAS अधिकारी, शादी के बाद बहु भी बनी IPS


आज हम आपको नारायण रिक्शे वाले कही कहानी बताएंगे। इनकी कहानी आपके अंदर एक जुनून पैदा कर देगी, जोश भर देगी। नारायण कहते हैं कि, वह बेटे गोविंद को रिक्शे पर बिठाकर खुद स्कूल छोड़ने जाते थे। हमें देखकर स्कूल के बच्चे मेरे बेटे को ताने देते थे- आ गया रिक्शेवाले का बेटा। मैं जब लोगों को बताता था कि मैं अपने बेटे को IAS बनाऊंगा तो सब हमारा मजाक बनाते थे। लेकिन किस्मत बदलते वक्त नहीं लगता। किस्मत ने करवट ली और आज मेरा बेटा एक IAS अधिकारी है।





देशभर से ऐसी कई कहानी सामने आती है, जो आपको जोश और जुनून से भर देती है। एक ऐसी ही कहानी आज हम आपको बताने जा रहे हैं, जिससे जानने के बाद आपको भी गर्व होगा। दरअसल, वाराणसी में एक रिक्शा चालक है नारायण, जिसने रिक्शा चलाकर अपने बेटे को पढ़ाया। नारायण पर महादेव की ऐसी कृपा बरसी की उसका बेटा IAS अफसर बन गया। पिता की मेहनत यहीं नहीं रूकी, इसके बाद उन्होंने अपनी बहू को भी एक ऊंचे पद पर लाकर बिठा दिया।
पिता की जी तोड़ मेहनत से बेटा तो IAS अधिकारी बन गया, कुछ सालों पर जब बेटे की शादी हुई तो उनकी बहू भी IPS अधिकारी बन गई। लोगों का कहना है कि वाराणसी में हर किसी पर महादेव की कृपा होती है। ऐसे में नारायण की यह कहानी वाकई एक मिसाल है। नारायण की 3 बेटियां हैं और एक बेटा। नारायण ने बताया कि एक किराए के मकान में रहकर जीवन का गुजारा कर रहे थे।
नाराण के पास 35 रिक्शे थे, जिन्हें किराए पर चलवाता थे, सब ठीक चल रहा था। जीवन बहुत सही तरीके से चल रहा था कि अचानक परिवार पर पहाड़ टूट पड़ा। पत्नी इंदु को ब्रेन हैमरेज हो गया, जिसके इलाज में काफी पैसे खर्च हो गए।इलाज कराने के लिए 20 से ज्यादा रिक्शे बेचने पड़े थे, लेकिन फिर भी वो नहीं बची। तब गोविंद सातवीं क्लास में थे। गरीबी का आलम ऐसा था कि मेरे परिवार को दोनों टाइम सूखी रोटी खाकर रातें काटना पड़ती थी।
बेटियों की शादी करने के लिए बचे हुए रिक्शे भी बिक गए। सिर्फ एक बचा था, जिसे चलाकर मैं घर को चला रहा था। पैसे नहीं होते थे, तो गोविंद सेकंड हैंड बुक्स से पढ़ता था। आज के समय में नारायण का बेटा गोवा में पोस्टेड है और दुनिया में एक मिशाल पेश की है। यही नहीं नारायण के बेटे के साथ उनकी बहु भी एक आईपीएस अधिकारी हैं। नारायण की बहु चंदना बताती हैं, फक्र है ऐसे ससुर मिले जिन्होंने समाज में एक मिसाल कायम की है। गरीबी-अमीरी की दीवार को गिराया और अपने आप को साबित कर दिया कि अगर सोच सही हो तो सपने हकीकत बनते है।


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