राम मंदिर के लिए शीतकालीन सत्र में कानून ला सकती है मोदी सरकार?

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राम मंदिर के लिए शीतकालीन सत्र में कानून ला सकती है मोदी सरकार?

नरेंदर मोदी की भाजपा  सरकार पर घर के अंदर से ही सभी तरफ से  दबाव बनता जा रहा है कि वो राम मंदिर को बनाने  के लिए संसद  में क़ानून लाए और अयोध्या में भगवन राम की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करे.

इस संभावना पर अंतिम मुहर  लगी RSS के विजयदशमी कार्यक्रम में मोहन भागवत के बयान से. RSS प्रमुख ने अपने वक्तव्य में कहा कि राम मंदिर के लिए कानून बनाना चाहिए. अगर भागवत यह बात कह रहे हैं तो वो एक तरह से सीधे सरकार को हमला  कर रहे हैं कि संघ और BJP के समर्थकों और राम के प्रति आस्था रखने वालों की भावनाओं को केंद्र  में रखते हुए मोदी सरकार को सदन में राम मंदिर के लिए क़ानून लाना चाहिए.

नरेंदर मोदी सरकार पर मंदिर निर्माण के लिए उलझन  कम नहीं है. ज़मीन पर कार्यकर्ताओं और वोटरों  को जवाब देने से लेकर स्वयं  को मंदिर निर्माण के लिए सन्मुख  दिखाना भाजपा के लिए ज़रूरी हो गया है .

दूसरी ओर साधुओ  ने सरकार को इस मुद्दे पर फटकारना  शुरू कर दिया है कि मंदिर निर्माण में विलंव  वे नहीं चाहते है  . साधुओ  का कहना है कि क्या BHAJPA मंदिर निर्माण का अपना वादा भूल गई है और क्यों SC के फैसले के इंतज़ार का बयान PARTY की ओर से हमेशा  दिया जा रहा है.


ध्यान रहे कि साधुओ  के एक बड़े वर्ग और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संतो  ने इस वर्ष दिसंबर से अयोध्या में मंदिर निर्माण की घोषणा कर दी है. साधू  समाज का कहना है कि वो मंदिर निर्माण का काम शुरू कर देंगे, सरकार रोकना चाहती है तो रोके.

साधू  का यह आह्वान सरकार के लिए कम चेतावनी पूर्ण  नहीं है. CENTRE की मोदी सरकार और राज्य में YOGI सरकार के लिए यह बहुत मुश्किल होगा कि साधुओ  को रोकने के लिए वे किसी भी प्रकार का बल प्रयोग करें. इससे भाजपा को अपने समर्थकों के बीच खासा नुकसान झेलना पड़ सकता है.

साधू  समाज की इस घोषणा को RSS प्रमुख के आज के भाषण से एक तरह की अनुमंती  मिल गई है. संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि वो राम मंदिर के लिए कोर्ट के फैसले का इंतज़ार नहीं करना चाहता और सरकार इसके लिए क़ानून लाकर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करे.

सरकार लाएगी विधेयक?

ऐसी स्थिति में BJP के पास अब एक ही रास्ता बचता नज़र आ रहा है और वो यह है कि राम मंदिर के प्रति अपनी वादा को पूरा  करने के लिए मोदी सरकार सदन के आगामी  मानसून सत्र  में राम मंदिर के विधेयक को रखे.

इससे BJP को लाभ भी है. पहला तो यह कि सरकार लोगों के बीच चुनाव से ठीक पहले यह स्थापित करने में सफल होगी कि उनकी सोच  राम मंदिर के प्रति क्या है. वो अपने वोटरों  को बता सकेगी कि कम से कम BJP और मोदी अयोध्या में राममंदिर के निर्माण के वादा  हैं.

दूसरा लाभ यह है कि विपक्ष के लिए यह एक सहज स्थिति नहीं होगी. विपक्ष इसपर टूटेगा. कांग्रेस के लिए यह आसान नहीं होगा कि वो राम मंदिर पर प्रस्ताव का विरोध करके अपनी सॉफ्ट हिंदुत्व की पूरी कोशिशों को मिट्टी में मिला दे. इससे विपक्ष में बिखराव भी होगा और सपा बसपा जैसी पार्टियों के वोटबैंक में भी सेंध लगेगी.


ध्यान रहे कि संतों और मतदाताओं के बीच संदेश देने के लिए चुनाव से ठीक पहले मोदी सरकार के सामने यह एक अहम और अंतिम मौका है. जनवरी से प्रयाग में शुरू हो रहे कुंभ के दौरान भी सरकार को संत समाज के सामने मंदिर के प्रति अपनी जवाबदेही स्पष्ट करनी होगी.

मोदी सरकार के लिए आगामी शीतकालीन सत्र इस सरकार का अंतिम सत्र होगा. इसके बाद का बजट सत्र एक मध्यावधि बजट के साथ समाप्त हो जाएगा और देश आम चुनाव में लग जाएगा. चुनाव से ठीक पहले अपने मतदाताओं के बीच राम मंदिर के लिए विश्वास जताना सरकार के लिए ज़रूरी है. देखना यह है कि सरकार इस विश्वास को जताने के लिए किस सीमा तक जाती है.

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