Everything Sold in Sonpur mela Bihar || कभी सोनपुर मेला में सबकुछ बिकता था ,महिला से लेकर पुरुष तक की लगती थी बोली

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Everything sold in sonpur mela bihar

Everything Sold in Sonpur mela Bihar || कभी सोनपुर मेला में सबकुछ बिकता था ,महिला से लेकर पुरुष तक की लगती थी बोली

विश्व भर में विख्यात सोनपुर मेला ,यु तो पशु – ख़रीद बिक्री का दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र है लेकिन एक दौर ऐसा था जब यंहा सब कुछ बिकता था | सब कुछ मतलब आप बिलकुल ठीक समझ रहे है , कोयल – तोता , भैस – गाय , घोडा – बकड़ी ,हाथी, स्त्री – पुरुष सब कुछ |


बदलते दौर और सरकार निर्देश  के साथ मेले के स्वरुप में परिवर्तन हुआ|अब मेले में खुलेयाम स्त्री पुरुष के बोली तो नहीं लगती लेकिन Indirect   तरीके से ऐसा मेले में आज भी होता है |जैसे मेले orchetra का आयोजन रात भर चलता है ,मनोरंजन के नाम पर इस आर्केस्ट्रा में ख़ूब अशिलिलता परोसा जाता है लोगों का मनोरंजन रात भर होता है और लोग सुबह घर लौट आते है लेकिन कभी उन लोगों ने सोचा है की उनका मनोरजन करने वाले आर्केस्ट्रा के कलाकार के बारे में हमें नहीं लगता कोई इन्सान सिर्फ पैसे मात्र के लिए अपना सब कुछ लोगों के आगे समर्पित कर देगा | वे कलाकार मज़बूरी के तौर पर ही ऐसा करते है पर इन सब बातों पर न तो किसी समाज -सेवी संस्था की नजर जाती न अखबारों के लेखकों की कलम टिकती है |

सरकार की तो बात करना ही बईमानी होगी जैसा की सब को पता है की हाथियों का ख़रीद – बिक्री ग़ैर – कानूनी है सरकार ने ख़ुद हाथी को संरक्षित पशु के क्षेणी में डाल रखा है फिर भी इस मेले में हाथियों की बिक्री भी हो ही रही है और सरकार सब जानते हुए हाथ – पर हाथ डाल कर बैठी है सिर्फ मेले के मनोरंजन के नाम पर |

रोचक है इस मेले का इतिहास ‘सोनपुर मेला

खैर मेले की कुछ बुराईयों के साथ कई अच्छाई भी है यंहा दुनिया भर से लोगों जमावड़ा रहता है पुरे महीने मेले के दौरान लोगों का आस्था इस मेले के प्रति अभी भी बरकार है , ऐसी मान्यता है इस मेले के बारे में की अगर आप किसी विपत -परस्थितियों में भी अगर आप अपने विश्वास पर कायम है तो आप का ही विजय होगा |इससे जुडी मेले का इतिहास भी है यंही वो जगह है जंहा गज ( हाथी ) – और गरांह (मगरमच्छ ) का भयंकर युद्ध हुआ था , यु तो हांथी बेहद शक्ति -शाली जानवर होता है लेकिन युद्ध के दौरान वो गंगा नदी में होता इस वजह से मगर उस पर भारी पड़ता है लेकिन हांथी भी अपनी लड़ाई में हार नहीं मानता खुद को मगर के आगे समर्पित नहीं करता उसका यह विश्वास देख कर श्री हरी ( भगवन ) विष्णु को स्वम हाथी के बचाव के लिए युद्ध – स्थल पर आना पड़ता है और भगवन हाथी को इस मुसीबत से बचाते है |

तभी से यह मेला लगातार चला आ रहा है |इस मेले का आयोजन कार्तिक के पूर्णिमा से शुरू होकर लगभग 15-20 तक चलता है बिहार – DELEGATION आप से अनुरोध करता है की आप भी इस मेले में पधारे ! हमारा यह पोस्ट अच्छा लगा हो तो अच्छा अच्छा कमेंट करके हमें बताना न भूले और अपने मित्रो के साथ इसे जरुर शेयर कर दे |


 

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