भारतीय रेल में मदद न पहुँचने के वजह से मासूम माँ के गोद मे दम तो देती हैं क्या यही रेलवे बुलेट चलाएगी ?

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भारतीय रेल में मदद न पहुँचने के वजह से मासूम माँ के गोद मे दम तो देती हैं क्या यही रेलवे बुलेट चलाएगी ?

घटना बरौनी से चल कर New दिल्ली जाने वाली स्पेशल ट्रेन 0443 की है।ट्रैन 6 तारीख़ को बरौनी से खुलती है अचानक ट्रैन में एक मासूम की तबियत बिगड़ जाती है।ट्रैन में बैठे औऱ भी यात्री अपने तऱफ से मासुम को बचाने का हर संभव प्रयास करते है ।

जैसे टीटी मदद माँगी गई ,रेलवे में मौजूद डॉ के बारे में जानकारी माँगी गयी ,ट्रैन अगले स्टेशन पर रुकवा कर मदद करने की बात कही गयी लेकिन रेलवे औऱ उसके प्रशासन के तरफ से कोई मदद नहीं मिली अंत मे वह मासुम बच्चा तड़प कर माँ गोद मे ही दम तोड़ दिया ।सवाल है क्या 2000 लोगों हज़ार किलोमीटर तक ले जाने वाली ट्रैन में एक डॉक्टर का उपलब्ध होना जरूर नहीं होता है ? यदि होता है तो डॉ इस ट्रेन में क्यों मौजूद नहीं था।हमारे यँहा एक विधायक ,सांसद की छोटी रैली हो तो पूरा डॉ का टीम नेता जी के पहुंचने से पहले तैयार मिलता है फ़िर जनता के मदद के समय इन डॉ को साँप क्यों सूंघ जाता है।

ट्रैन में घटी जानकारी के बारे में ट्रेन में ही मौजूद एक यात्री rahul झा वत्स अपने फेसबुक पर पूरा घटना कर्म लिखतें है जो की भारतीय रेल की सच्चाई है राहुल पूरे घटनाकर्म के दौरान उसी ट्रैन में मौजूद होते है औऱ अपनी तरफ से मदद पहुंचाने का प्रयास करते है लेकिन उनकी ये मदद भी व्यर्थ चली जाती है।

 

 

 

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