Manoj Tiwari Special || कभी सांसद के सर्वेंट क्वाटर में सर छुपाने के लिए मजबूर थे ,आज खुद है सांसद

Manoj Tiwari Special || कभी सांसद के सर्वेंट क्वाटर में सर छुपाने के लिए मजबूर थे ,आज खुद है सांसद

BIHAR NEWS

Manoj Tiwari Special || कभी सांसद के सर्वेंट क्वाटर में सर छुपाने के लिए मजबूर थे ,आज खुद है सांसद

कामयाव होना या कामयावी किसे अच्छी नहीं लगती | आज हर कोई मनोज तिवारी , निरहुआ, खेसारी लाल , रवि किशन , पवन सिंह जैसा फ़ेमस होने की चाह रखता है और रखनी भी चाहिए | लेकिन अपनी इन चाहतो को पूरा करने के लिए जनून भी उस आइडल के तरह रखना चाहिए जैसा आप बनाना चाहते है |



हम आज आप के साथ बात कर रहे है मनोज तिवारी के बारे में जिन्हें आज भोजपुरी के अमिताभ – बच्चन जैसे कलाकारों के सामौख देखा जाता है | उस मनोज तिवारी की बात कर रहे है जो की आज एक गायक , अभिनेता , नेता , फिल्म डायरेक्टर , क्रिकेटर और भी कई गुणों के खान के रूप में जाना जाता है | आज उनकी तमाम ख़ुबियो के साथ – साथ इस गुणों को पाने में हुए संघर्ष का जिक्र आप के साथ करेंगे |MANOJ TIWARI SPECIAL

आप को बता दूं की मनोज तिवारी का जन्म बिहार कैमूर जिले के अतरवलिया के छोटे से  गांव में हुआ था और यंही से शुरू हुई मनोज तिवारी की संघर्ष की कहानी | मनोज तिवारी को बचपन से ही संगीत का काफी शौक था इसके लिए वह ग़ाव घर में जो माँ – बहने शादी – विवाह जैसे शुभ आयोजन पर गीत – गाती है उसे सुना करते थे | कभी – कभी तो चुप – चुप के इस गीत के आयोजन में शामिल भी हो जाते थे |

गीत – संगीत के साथ – साथ उन्हें पढाई में भी रूचि थी उन्होंने अपनी शुरुआत लेवल तक की पढाई अपने गाँव में ही पूरा किया इसके बाद आगे की पढाई के लिए बनारस विश्वविद्यालय जाना पड़ा , आपको को बता दूँ की मनोज तिवारी का विश्वविद्यालय में चयन उनके योगता के आधार पर हुआ था उन्हें उनके पढाई में अच्छा पर्दर्शन करने के वजह से उन्हें इस विश्वविद्यालय में स्कोलरशिप मिली हुई थी |


यंही से उनके छुपे गुणों का आभास हुआ बनारस विश्वविद्यालय के ही एक कार्यक्रम जो वर्ष 1992 में आयोजित की गयी थी उसमे उन्होंने भाग लिया संगीत में और अच्छा संगीत गया जिसके वजह से उन्हें 1400 रूपए उपहार स्वरुप मिले |यंही पर उन्होंने अपने एक और गुण क्रिकेट के बारे में भी पता चला | वे बनारस विश्विद्यालय के क्रिकेट टीम के कॅप्टन रहे कई सारे मैच खेले |MANOJ TIWARI SPECIAL

इसके बाद आगे के पढाई और अपने संगीत के रूचि को करियर बनाने के लिए दिल्ली आये यंहा उन्हें बहूत मेहनत करनी पड़ी दिल्ली में अपने सर छुपाने के लिए अपने एक मित्र की मदद मांगी जो एक सांसद के यंहा चतुर्थ वर्ग कर्मचारी थे , उनके मदद के वजह से उन्हें जैसे – तैसे दिल्ली में छत तो मिल गयी अब जरुरी था अपने संगीत के जनून को पूरा करने के लिए गायक के तौर पर खुद को पेश करने की इसके लिए उन्होंने कई म्यूजिक कंपनी के दफ्तर के आस – पास चक्कर काटे कोई भी उन्हें PLATFORM देने के लिए तैयार नहीं था उन्हें कई बार इन कंपनी ने मिलने से मना कर दिया , किसी ने उनकी संगीत सुनी भी तो अच्छा नहीं बताया |

मनोज तिवारी काफी परेशान रहने लगे थे लेकिन अपनी जनून के लिए फिर भी रोज घर से बहार निकलते थे आख़िर वो दिन आ ही गया जब उन्हें एक मौका मिला | उनकी मुलाकात गुलशन कुमार से हुई उन्होंने उनको एक गीत गाने का मौका दिया ” बगल वाली जान मरे ली ” इसके बाद उन्होंने ने मुर कर पीछे नहीं देखा और लगातार उनके हिट – गाने और फिल्मो की झड़ी लग गयी उन्ही फिल ” ससुरा बड़ा पैसा वाला silver जुबली हिट हुई |कई सारे हिंदी फिल्मो , में गाने और अभिनय करने का मौका मिला , उन्होंने कई रियलिटी शो भी होस्ट किये | उनकी पर्सिधी बढ़ने लगे |

इसके बाद उन्होंने राजनितिक में अपनी रूचि दिखाई यंहा भी उनके पहले मायूसी ही हाथ लगी जब वे 2001 गोरखपुर से उत्तर -परदेस के वर्तमान मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ चुनाव हार गए , इसके बाद वे राजनितिक से थोड़ी दुरी बना लिए फिर 2014 के लोक – सभा चुनाव में दुबारा एक्टिव हुए इस बार वे दिल्ली के बुरारी लोकसभा क्षेत्र से सांसद के रूप में चुन लिए गए | इसके बाद उनके अच्छे पर्दर्शन को देखते हुए उन्हें उनकी पार्टी ने दिल्ली का परदेश अध्यक्ष बना दिया | और आज वे किसी पहचान के मुहताज नहीं है |

नोट – ये थी मनोज तिवारी स्पेशल पोस्ट अगर आपको पोस्ट अच्छा लगा हो तो हमें कमेंट कर के बताये ताकि हम और भी इस तरह का पोस्ट लिख सके | इसे अपने मित्रो को साथ शेयर करना और हमें अपना सुझाव भेजना न भूले |

 

Please follow and like us:

Leave a Reply