देश का चलता फिरता ब्लड बैंक हैं ये शख्शियत- मुकेश हिसारिया

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कहते हैं रक्तदान महादान होता है। ये किसी की भी जिंदगी को बचा सकता है। कई बार ऐसा होता है कि रक्त की कमी के चलते व्यक्ति की जान भी चली जाती है। समाज के लिए रक्त की आवश्यकता को समझते हुए पटना के महेंद्रू के रहने वाले मुकेश हिसारिया वर्चुअल ब्लडबैंक खड़ा करके लोगों के लिए उम्मीद बने हुए हैं।

मुकेश की पहचान एक समाजसेवी और रक्तदाता के रूप में है। 46 वर्षीय मुकेश पिछले 27 सालों से रक्तदान के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। सोशल मीडिया की मदद से वे न केवल पटना बल्कि देश के कई हिस्सों में रहने वाले हजारों जरूरतमंदों को रक्त मुहैया करा चुके हैं।

कुछ ऐसा संयोग इस महान कार्य को करने से पहले

सन्न 1991 में अपनी मां के इलाज के लिए वेल्लौर के Cmc अस्पताल गए। वहां जब खून की जरूरत हुई तो रक्तदान का ख्याल आया। मां का ऑपरेशन सफल रहा और घर लौटने के पहले वहां रक्तदान किया। रक्तदान के बाद जो कार्ड मिला उसे पटना आकर वेल्लौर जा रहे एक मरीज को दे दिया ताकि खून के लिए उसे वहां परेशान नहीं होना पड़े।

शुरुवात में मुकेश की माँ और पत्नी ने भी इस कार्य का किया था विरोध..

मुकेश कहते हैं, शुरुआत में रक्तदान करने पर मां ही टोकती थी। कहती थी कि तुम्हारे ही शरीर में सबसे ज्यादा खून हो गया है। पत्नी ने भी शुरुआत में थोड़ा विरोध किया मगर बाद में प्रभावित होकर वह खुद इस मुहिम से जुड़ गई।

मुकेश कहते हैं, सरकार के पास 39 ब्लड बैंक हैं फिर भी लोगों को खून के लिए परेशान होना पड़ता है। हमारी टीम के सिर्फ एक मैसेज पर सैकड़ों की संख्या में रक्तदान के लिए लोग दौड़ जाते हैं। रक्तदाताओं की संख्या इतनी है कि उसे संभालने के लिए संसाधन कम पड़ते हैं। हम चाहते हैं कि हमारी संस्था वैष्णो देवी सेवा समिति का अपना ब्लड बैंक हो। हमारा सपना है, देश भर में थैलेसीमिया और हीमोफीलिया के पीड़ितों को मुफ्त खून सुलभ हो सके।

आज इस महान कार्य के कारण मुकेश की पहचान ना सिर्फ राज्य स्तर पर बल्कि देश के हर कोने कोने में हैं…

#बिहार_डेलीगेशन मुकेश की इस व्यक्तवित को सलाम करता है…

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