विधानसभा में रखे गए 4 विधेयक: मिलावटी व अवैध शराब बेचने वालों को होगी उम्रकैद की सजा व 10 लाख जुर्माना

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NEW WINE RULES IN BIHAR
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पटना.बिहार विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार से शुरू हो गया। पहले दिन सदन में 4 विधेयक रखे गए। शराबबंदी से ताल्लुक रखने वाले विधेयक में लोगों के लिए कानून को थोड़ा नरम किया गया है। मगर मिलावटी और अवैध शराब बेचने वालों पर सख्ती बढ़ाई गई है। इनको उम्रकैद होगी। 10 लाख रुपए जुर्माना देना पड़ेगा। दहेज रोकने का पुराना कानून खत्म होगा। नया कानून और सख्त होगा। थर्ड और फोर्थ ग्रेड के तकनीकी पदों पर नियुक्ति के लिए आयोग बनेगा। वाणिज्यकर अधिकारियों का पदनाम बदलेगा।


शराबबंदी कानून में संशोधन
शराबबंदी कानून में थोड़ी नरमी की गई है। बिहार मद्य निषेध उत्पाद कानून 2016 के कई प्रावधानों में संशोधन किया गया है। पहली बार शराब पीते पकड़े जाने की सजा जमानती बनी है। पहली बार शराब पीने पर पकड़ने जाने पर 50 हजार का जुर्माना या तीन महीने की सजा होगी। ऐसा दूसरी बार करने पर एक से पांच साल की सजा और एक लाख से पांच लाख रुपये तक अर्थ दंड लगेगा। फिलहाल शराब पीते पकड़े जाने पर पांच से 10 साल की सजा का प्रावधान है।

दुरुपयोग को रोकने के लिए संशोधन विधेयक लाया गया
बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद (संशोधन) विधेयक 2018, 22 जुलाई को विधानसभा में पेश किया जाएगा। नए प्रावधान के तहत अब अगर किसी होटल या प्रतिष्ठान में शराब पीते कोई पकड़ा गया, तो पूरे परिसर की बजाए सिर्फ उसी कमरे को सील किया जाएगा जिसमें शराब मिलेगी। विधेयक में कहा गया है कि राज्य सरकार ने वर्तमान शराबबंदी कानून के हो रहे दुरुपयोग को रोकने के लिए संशोधन विधेयक लाया गया है। नए प्रावधान के अनुसार शराब या नशे की हालात में अगर कहीं हुड़दंग करने पर या अपने घर या कार्यालय में शराब पीने की अनुमति देने पर दस साल की सजा और आजीवन कारावास की सजा मिलेगी। ऐसा कोई स्थान जहां शराब मिलने पर भी सील नहीं किया सकता, उस स्थान को ध्वस्त कर दिया जाएगा। इसके लिए आवश्यक कार्रवाई का अधिकार जिलाधिकारी को दिया गया है।

अब घर के सभी वयस्क नहीं होंगे गिरफ्तार

बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद (संशोधन) विधेयक 2018 में 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों की बजाए सिर्फ पीने वाले को ही पकड़ा जाएगा। जबकि वर्तमान प्रावधान के अनुसार शराब पीते पकड़े जाने पर परिवार में 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए सजा का प्रावधान है। नए प्रावधान में सामूहिक जुर्माना और जिलाबदर करने के नियम को भी शिथिल कर दिया गया है। नए कानून में किसी गांव या मुहल्ला पर सामूहिक जुर्माना के प्रावधान को खत्म कर दिया गया है। पुलिस अधिकारी की पुष्टि के बाद जिलाधिकारी को किसी भी मुहल्ला, गांव या बस्ती पर सामूहिक जुर्माना लगाने का अधिकार था।




मिलावटी शराब या अवैध शराब बेचने पर और कड़ी सजा
मिलावटी शराब या अवैध शराब बेचने पर और कड़ी सजा के प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत, अगर कोई मिलावटी या अवैध शराब बेचता है तो ऐसे मामले में पुराने कानून की तुलना में अब और भी अधिक सजा का प्रावधान किया गया है। अब ऐसे मामलों में आजीवन कारावास की सजा होगी। दस लाख रुपए तक जुर्माना भी वसूला जाएगा। फिलहाल पकड़े गए लोगों को अधिकतम 10 साल की सजा और एक लाख रुपए के जुर्माने का प्रावधान है। अगर किसी परिसर में मकान मालिक की जानकारी के बिना शराब का अवैध भंडारण किया जाता है तो सिर्फ किराएदार पर ही कार्रवाई होगी। मकान को जब्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल ऐसे मामले में मकान मालिक को भी 8 साल की सजा का प्रावधान है। नए प्रावधानों के तहत अगर मकान मालिक या कोई दूसरा व्यक्ति जिसे वहां शराब पीने या भंडारण की जानकारी है तो उसे सूचना नहीं देने के आरोप में अब अधिकतम दो वर्ष की सजा होगी। शराब पीकर हुड़दंग करने, अपने घर पर शराब पार्टी करने, शराब पार्टी में मदद करने अथवा अपने घर या प्रतिष्ठान में शराबियों का जमावड़ा करने पर, पकड़े जाने पर अब 10 साल की बजाए आजीवन कैद की सजा होगी। ऐसे मामलों में एक से दो लाख रुपए तक का जुर्माना भी होगा।

और सख्त होगा दहेजबंदी का नया कानून
राज्य में दहेजबंदी के मौजूदा कानून को अब और भी सख्त बनाया जाएगा। शुक्रवार को राज्य सरकार ने दहेज प्रतिषेध बिहार प्रतिषेध (संशोधन) (निरसन) विधेयक 2018 के प्रारूप को विधानसभा में रखा गया। इस बिल पर सदन की अगली बैठक में चर्चा होगी। समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा द्वारा पेश इस संशोधन विधेयक में दहेज प्रतिषेध कानून के मौजूदा प्रावधानों को और भी कड़ा रूप देने की आवश्यकता जताई गई है।

तकनीकी कर्मियों की बहाली अलग आयोग के जरिए
पारा मेडिकल स्टाफ समेत सभी तकनीकी सरकारी सेवकों की बहाली अब अलग आयोग से होगी। राज्य सरकार ने शुक्रवार को बिहार तकनीकी कर्मचारी चयन आयोग (संशोधन) विधेयक 2018 को विधानसभा में रखा। इसके तहत 4800 रुपए ग्रेड-पे से कम ग्रेड-पे वाले राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और क्षेत्रीय कार्यालयों में समूह ‘ख’ और ‘ग’ के सरकारी सेवकों की बहाली इसी आयोग के माध्यम से होगी। सरकार इसके लिए तकनीकी कर्मचारी चयन आयोग अधिनियम 2014 की धारा-8 में संशोधन करेगी।

वाणिज्य कर अफसर अब कहलाएंगे सहायक आयुक्त राज्य कर
वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों का पदनाम बदल गया है। अब वाणिज्य के विभाग के अधिकारियों के वर्तमान ग्रेड को बिना आर्थिक लाभ दिए एक पद अपग्रेड कर दिया गया है। इसके लिए बिहार वित्त विधेयक 2018,22 जुलाई को विधानसभा के पटल पर पेश किया जाएगा। जुलाई 2017 में माल एवं सेवा कर( जीएसटी) लागू होने के बाद केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सीजीएसटी और एसजीएसटी के नाम से एक लेकिन अलग-अलग कर वसूली किए जाने का प्रावधान है। नई व्यवस्था के तहत केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों के क्रास इंपावरमेंट का प्रावधान किया गया है। यानी राज्य सरकार के अधिकारी जहां सीजीएसटी के नियमन में दखल दे सकते हैं वहीं केंद्र सरकार के अधिकारी एसजीएसटी में। नए विधेयक के अनुसार वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों को जीएसटी अधिनियम के साथ-साथ पूर्व में वैट के लंबित मामलों को भी निपटारे करने का अधिकार दिया गया है।

नया पदनाम

आयुक्त वाणिज्य कर
मुख्य आयुक्त राज्य कर
अपर आयुक्त वाणिज्य कर
विशेष आयुक्त राज्य कर
संयुक्त आयुक्त वाणिज्य कर
अपर आयुक्त राज्य कर
उपायुक्त वाणिज्य कर
संयुक्त आयुक्त राज्य कर
सहायक आयुक्त वाणिज्य कर
उपायुक्त राज्य कर
वाणिज्य कर अधिकारी
सहायक आयुक्त राज्य कर

SOURCE – DAINIK BHASKAR

BIHAR NEWS

 

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