आज शिक्षको और छात्रों के लिए रोल मॉडल है रंजीत सर !प्राइवेट से बढ़िया पढाई की व्यवस्था है बिहार के इस सरकारी स्कूल में

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अगर आप अभी तक बिहार के सरकारी स्कूल के जज्जर व्यवस्था और सरकारी शिक्षक  के सोने से वाली कहानी सुनी हो तो ! आप जाग जाइये ? हम आपका जेनरल नॉलेज अभी अप – डेट कर रह है |

 

बिहार में एक ऐसा भी सरकारी जंहा की वय्वाथा प्राइवेट से भी बढ़िया और हम तो कहेंगे आप अभी अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजने का प्लान बना ही लीजिए |हम बात कर रहे बाल संसद,उत्क्रमित मध्य विद्यालय कोनन,जमुई की यंहा की स्कूल में हर वो सुविधा बच्चों को दी जाती है , जो की एक प्राइवेट स्कूल में दी जाती है छोडिये भी बात – बात पर प्राइवेट स्कूल की बात करना ठीक नहीं है |

दरसल इस स्कूल में हर वो सुविधा बच्चो को दी जाती है जो एक बच्चे का अधिकार है  right to education के तहत |     अब  आप सोच रहेंगे होंगे की आखिर कैसे इस स्कूल  बच्चे बढ़िया पढाई , खेल -कूद ,नृत्य संगीत जैसे सोशल एक्टिविटी मिल पाती है जो की बिहार के अन्य सरकारी स्कूल में नहीं मिलता |

जबाब सिम्पल है जनाब बस  बच्चे और उनके माता पिता जागरूक करना होता है की बच्चे को नियमित तैयार करके स्कूल भेजे | इस में हमारी बच्चों के माता -पिता ने हमारी बात मानी और बच्चे को प्रोपर स्कूल ड्रेस में बच्चे स्कूल आने लगे यंहा तक की बिहार के सरकारी स्कूल ड्रेस में बच्चों के tie-batch का पर्फुम नहीं है फिर बच्चों के अभिभावक ने उन्हें अपने पैसे से  tie-batch खरीद कर दिया |

रंजीत कुमार बताते है की यह करना बेहद आसान है बस जागरूक रहना होता है |जब देश के भविष्य ( बच्चो ) की निर्माण की बात हो तो थोड़ी बहुत अपने जीवन के पूंजी में से भी खर्च करनी चाहिए | शुरुआत में हमें दिक्कत आती है फिर बाद में सब ठीक हो जाता है |जब वो स्कूल ज्वाइन किये थे तब स्कूल की हालत बेहद जज्जर दी boundary टूटी थी हमने अपने हाथो इसे बस के मदद (घेरवा ) बना कर इसे तैयार किया इसमें हमरी अन्य शिक्षको और गांव वालो ने भी मदद किया | हम बच्चों के लिए सरकार से मिल रही हर योजना पर नजर रखते है | ताकि हमारे बच्चे को हर सुविधा मिल सके |

बच्चों के माता – पिता भी पढाई के प्रति जागरूक हो इसके लिए हम बच्चे के घर जा कर उनके माता पिता को भी पढाई की महत्त्व  को समझते है |इसमें हमें हमरी सहयोगी शिक्षको और बच्चों के अभिभवकों का भी अब योगदान मिलने लगा है जिससे हमारी स्कूल की व्यवस्था आज अच्छी है और हम इसे और बेहतर करेंगे |

बिहार delegation की सुझाव – आज हर सरकारी स्कूल के शिक्षको और बच्चों के अभिवाको को कोनन स्कूल की कहानी से कुछ सिखाना चाहिए – ताकि देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो सके – सरकार के कोसने से हमारी व्यवस्था नहीं सुधरने वाली इसमें हमें भी योगदान करना चाहिए |फिर जाईये अपने पास के सरकारी स्कूल में और देखिये आप अपने पास वाली सरकारी स्कूल के लिए क्या कर सकते है |

रंजीत कुमार का जन्म   जिला-लखीसराय,प्रखंड-चानन,पोस्ट-बिछबे,ग्राम-महेशलेटा में हुआ था । पिता जी का नाम स्वर्गीय किशोरी मंडल व् माता जी का नाम सोना देवी हैं,इनके परिवार  पाँच भाई और दो बहन हैं भाई-बहन में हम सबसे छोटे हैं। इनकी  शिक्षा ग्रामीण परिवेश से ही प्रारंभ हुई।
Ranjeet: 2006 में मैट्रिक,2009 में इंटर (विज्ञान),2013 में स्नातक (इतिहास) और साथ ही साथ हम आईटीआई भी किये हुए हैं।
Ranjeet: शिक्षक के रूप में मेरी प्रथम नियुक्ति वर्ष-2013 में जिला-गया के मोहरा प्रखंड के शाहजदपुर गाँव में हुआ उसके बाद मैं अपने पड़ोसी जिला जमुई के प्रखंड-सिकंदरा,गाँव कोनन में 22 मार्च 2014 में नियुक्ति लिए।
Ranjeet: शिक्षा के क्षेत्र में  इन्हें    जिला-रत्न पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया है ।

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