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बिहारी भी धाकड़ होते है !

बिहारी इस फिल्ड में भी धाकड़, जो भी बिहारियों को हलके में लेते हैं तो पहले ये खबर पढ़ लें

बिहार में स्टार्टअप के मायने समझने की शुरुआत ढाई साल पहले हुई, समझाने की शुरुआत छह महीने पहले हुई. लेकिन बिहार के युवा उद्यमियों ने स्टार्टअप के मायने-मतलब पहले ही समझ लिए हैं. अब नतीजा यह है कि बिहार के 6 युवा स्टार्टअप से देश में धूम मचाने जा रहे हैं. कोई बेगूसराय का है तो कोई गया से है.
बता दें कि मार्च 2015 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्टार्टअप पॉलिसी बनाने के लिए कमेटी बनाई. लेकिन पॉलिसी का इम्प्लीमेंटेशन मार्च 2017 में हुआ. हालांकि स्टार्टअप सरकारी मदद मिलने से पहले से ही फलने-फूलने लगे थे. अब तक बिहार के छह स्टार्टअप का चयन स्टार्टअप इंडिया के तहत हुआ है. ये सभी स्टार्टअप बिहार एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन के इन्कयूबेशन सेंटर, एंटरप्राइजिंग जोन से जुड़े हैं. एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी अभिषेक सिंह ने बताया कि बिहार से स्टार्टअप इंडिया में सिर्फ छह स्टार्टअप का चयन हुआ है. ये सभी बिहार में रहते हुए राष्ट्रीय स्तर का काम कर रहे हैं.
फंडिंग के लिए बनाया बीईए ने प्राइवेट इन्वेस्टर ग्रुप
स्टार्टअपप्रोग्राम में स्टेट या सेंट्रल लेवल तक चयनित होने के बाद अब बिहार एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन ने एक प्राइवेट इन्वेस्टर ग्रुप भी बनाया है। बीईए जनरल सेक्रेटरी अभिषेक सिंह ने बताया कि यह ग्रुप बिहार के स्टार्टअप को 5 से 20 लाख तक की फंडिंग को सपोर्ट करेगा. हम बैंक से भी बात कर रहे हैं, जिससे बैंक बिहार के प्रोजेक्ट्स को फंड दे। अभी बीईए के इन्कयूबेशन सेंटर में लगभग 150 इन्क्यूबेटीज जुड़े हैं। इसमें 113 का चयन तो स्टेट गवर्नमेंट के रिकमंडेशन पर ही हुआ है. जबकि 1200 आवेदन अब भी लंबित हैं।
बिहार से पहली ट्रांसजेंडर स्टार्टअप
स्टार्टअप और एंटरप्रेन्योरशिप के मामले में बिहार के हाथ एक और उपलब्धि है. किसी भी स्टेट में पहली बार बिहार में ही किसी ट्रांसजेंडर को रिकग्निशन दिया गया है. बीईए के इन्कयूबेशन सेंटर से जुड़ी ट्रांसजेंडर रेशमा प्रसाद के स्टार्टअप नाचबाजा डॉट कॉम को स्टार्टअप बिहार प्रोग्राम के तहत रिकग्निशन मिला है।

स्टार्टअप इंडिया में चयन के मायने :
15 अगस्त 2015 को केंद्र सरकार ने स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम की घोषणा की. 19 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में स्टार्टअप इंडिया प्रोग्राम को लाॅन्च किया. यह प्रोग्राम देशभर से स्टार्टअप का चयन कर उन्हें सहायता देता है. इस कैटेगरी में चयन के बाद किसी भी स्टार्टअप को देशभर में अलग पहचान मिलती है जो प्रोजेक्ट्स में उनकी मदद करती है. स्टार्टअप के बिजनेस मॉड्यूल पर टैक्स बेनीफिट भी दिए गए हैं. साथ ही बिना किसी कोलैटरल के 10 करोड़ रुपए तक का फंड स्टार्टअप इंडिया के तहत चुने गए स्टार्टअप को ही मिलता है.
ऑस्ट्रेलिया से आए गर्थ हैलोवे अब बिहार में काम करते हैं. क्लीन वाटर का उनका स्टार्टअप भी चयनित हुआ है. बिहार में काम कर रहे यूपी के जितेंद्र अवस्थी का स्टार्टअप अलग बुखार का इलाज एक ही तरीके से करता है. पुष्पराज कौशिक का यह स्टार्टअप इंडिविजुअल के हेल्थ चेंजेज को बताता है. यह हेल्थ एनालिसिस प्लेटफॉर्म है.
गया के रंजन वर्मा का यह स्टार्टअप, इंडिविजुअल और कॉरपोरेट के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग करता है. पटना के शांतनु विभोर ने स्कूलों के लिए नॉलेज शेयरिंग प्लेटफॉर्म बनाया है, जिसे स्टार्टअप इंडिया में जगह मिली है. बेगूसराय के अमर कुमार जामधियार का यह स्टार्टअप वर्चुअल क्लिनिक है, जो अलग-अलग तरीके से हेल्थ सर्विस देता है.


 

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