आप भी अपना विज्ञापन यंहा दिखा सकते है सिर्फ 500/-M में कॉल करे 9811695067






Breaking News

आप हमारे ब्लॉग पर बिहार से जुड़े खबर पढ़ सकते है !, आप भी हमें खबर भेज सकते है !| आप इस ब्लॉग पर अपने विचार स्वतंत्र रूप से रखे हम पाठको के साथ शेयर करेंगे ।

💐 💐 "दहेज़ " शायद मेरे शब्द आज कुछ लोगो को कारवां लगे ।

दहेज़ की चाह रखने वाले व्यक्ति की मानसिकता एक भिखारी से भी गयी गुजरी होती है , बेचारा भिखारी तो
फिर भी दो वक्त के भोजन के लिए हाथ फैलता है , कभी सुना है की किसी भिखारी ने
आप से कपड़े की मांग की हो,भला हो उस सज्जन पुरुष का जिसे कप-कपाती ठंढ में,किसी सड़क के फुटपाथ पर परे जिव मात्र पर दया स्वरुप खुद अपनी मर्जी से कम्बल ओढ़ा जाते है , मैंने किसी भिखारी को अपने हक़ के लिए सड़क पर आवाज नहीं देखा शायद इस लोकतान्त्रिक देश में उनका कोई मौलिक अधिकार न हो , जीने के लिए भोजन और पानी की आवश्य्कता न हो तो भिखारी इसके लिए भी हाथ न फैलाये इनसे तो बढ़िया भिकारी है जो कम से जिंदगी की लड़ाई तो नहीं हारा , बेचारे एक रूपये के बदले करोड़ो के दुआ दे देते है उन सेठो को । दहेज़ लोभित व्यक्ति की मानसिकता को इस कदर गिर गयी है की रूपए पैसे की बात तो छोड़िये अपने कदमो पर लरखरा भी नहीं सकते इनके दहेज़ स्वरुप , साइकल ,मोटर - साइकल चाहिए , आज कल मांग दो पहिया से उठ कर चार पहिया पर आ गया है माने इनका बैलेंस दो पहिया पर बन नहीं पाता चार पहिया वाली गाड़ी सड़क पर सीधी खरी रह जाती है , वक्त इतना ख़राब चल रहा है की घरी भी ससुराल वाली चाहिए । अगर आप अपनी बेटी ऐसी को ऐसी मानसिकता वाली लोगो के
खुटे से बांधोगे , तो क्या भडोसा की वे आप के गाय स्वरूप बेटी के लिए दो वक्त की चारे की वयवस्था भी कर सके ।आगे ससुराल से भूसा - चोकर की मांग नहीं करेगा ।अब आप कहोगे की मैंने आप की बेटी की तुलना जानवरो से की तो आप को बता दू की गाय हमारी माता है , जानवरो जैसे तो सोच तो दहेज़ देने वाले लोग की भी जो बेटी को बारे में सोचते है की करना क्या है इसको चूल्हा- चौका के अलावे , उनको तो ये भी नहीं पाता की बेटिआ क्या नहीं कर बन सकती , डॉक्टर , इंजीनियर , किसान , शिक्षक , सब कुछ बन सकती है , फिर सांड स्वररूप डॉक्टर , इंजीनियर को ढूंढने लगते है , घबरओ मत ऐसे डॉक्टर और इंजीनियर बाबू सारा एक्सेपरिमेंट आप के बेटी पर ही करेगा ।खुद तो करेगा ही अपनी माँ -बहिन को भी छोड़ देगा यातना स्वररूप । अपने बेटी के लिए सबसे पहले एक इंसान ढुढे जो आमदा रखता हो आप के बेटी को दो वक्त की रोटी और अपने घर में , इस जीवन में सम्मान दिलाने का । और
उससे पहले अपनी बेटी को इस कदर ससक्त बनाये की रिश्ते की पहल बेटी वाले करे ये परम्परा भी टूटे , अब वर पक्ष, वधु पक्ष को ढूंढे दहेज़ को ना कहे यह के सामाजिक बुराई तो है ही दण्डनीये अपराध भी है ,हम दहेज़ १००%खिलाफ है समाज में दहेज़ की कोई जगह नहीं है चाहे वो ससुराल का एक रुमाल ही क्यों न हो ।
चन्दन कुमार पटेल ( बिहार डेलीगेशन )..💐..

No comments