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कुछ अनसुनी कहानी भारत के एक गणितज्ञ जिन्होंने आइंस्टीन के सिद्धांत को चुनौती दी I

WRITTEN BY MANOJ KUMAR

वशिष्ठ नारायण सिंह जी भारत के एक महान गणितज्ञ हैं I डा वशिष्ठ नारायण सिंह का जन्म बिहार के भोजपुर जिले के बसंतपुर गांव में एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। बचपन से ही ये पढाई में काफी तेज थे I इन्होने सन 1962 में बिहार से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की तथा आगे की पढ़ाई के लिए इन्होने पटना साइंस कॉलेज में प्रवेश लिया I यहाँ अध्यापकों द्वारा पढ़ाते हुए उनकी किसी भूल या त्रुटि को तुरंत पकड़ लिया करते थे और अध्यापक को इसे ठीक करने को कहते थे कई बार ऐसा होने पर शिक्षक भी इनसे परेशान रहने लगे और शिक्षक ने इसकी शिकायत प्रिंसिपल को कर दी इस पर प्रिंसिपल ने इनकी परीक्षा ली और इन्हे गणित के कठिन से प्रश्न हल करने को दिए जिसे इन्होने चुटकियों में हल कर दिया था वे एक सवाल को कई विधियों से हल कर सकते थे जिसका उत्तर समान होता था I
उसी दौरान कॉलेज में एक मैथमेटिक्स कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कांफ्रेंस में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बार्कले के एचओडी प्रो जॉन एल केली भी मौजूद थे।कांफ्रेंस में मैथ के पांच सबसे कठिन प्रॉब्लम्स दिए गए, जिसे दिग्गज स्टूडेंट्स भी करने में असफल हो गए, लेकिन वशिष्ठ नारायण सिंह ने पांचों सवालों के सटीक जवाब दिए। उनके इस जवाब से प्रो केली काफी प्रभावित हुए और उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका आने को कहा।
1963 में वे कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय शोध के लिए गए I 1969  में इन्होने यहाँ से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की चक्रीय सदिश समष्टि सिद्धांत पर किए गए उनके शोध कार्य ने उन्हे भारत और विश्व मे प्रसिद्ध कर दिया।अपनी पढाई खत्म करने के बाद कुछ समय के लिए वे भारत आए, मगर जल्द ही वे अमेरिका वापस चले गए। इस बार उन्होंने वाशिंगटन में गणित के प्रोफेसर के पद पर तथा कुछ समय नासा में भी काम किया । एक बार की बात है नासा में अपोलो मिशन के दौरान काम करते समय कुछ समय के लिए नासा के कम्प्यूटर बंद हो गए और इन्होंने अपनी ऊँगलियों पर ही सूक्ष्म गणना कर दी जिसे बाद में बिलकुल सही पाया गया
1971 में वे भारत लौट आये और इन्होंने यहाँ पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर और भारतीय सांख्यकीय संस्थान, कलकत्ता में काम किया।
1973 में उनका विवाह वन्दना रानी के साथ हुआ। 1974 में उन्हे मानसिक दौरे आने लगे। उनका राँची में इलाज हुआ। । प्रख्यात गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह ऐसी ही बीमारी सिजोफ्रेनिया के जाल में उलझे हुए हैं। बीमारी से पीड़ित तथा इनके असामान्य व्यव्हार के कारण इनकी पत्नी इन्हे छोड़ के चली गयी I
एकबारगी देखने पर यकीन करना मुश्किल है कि ये वही शख्स हैI अयोध्या बाबू कहते हैं, 'भइया अमेरिका से बहुत सारी किताबें लेकर आए थे। उनकी किताबों से कई बक्से भरे हुए हैं। हमारी योजना उनके नाम पर लाइब्रेरी खोलने की है। अगर सब कुछ ठीक हा तो जल्द ही ये सपना पूरा होगा।'
उन्हें बिहार सरकार ने ईलाज के लिएं वेंगलुरू भेजा था। लेकिन बाद में ईलाज का खर्चा देना सरकार ने बंद कर दिया। एक बार फिर से बिहार सरकार ने विश्वविख्यात गणितज्ञ के इलाज के लिए पहल की है। विधान परिषद की आश्वासन समिति ने 12 फ़रवरी 2009 को पटना में हुई अपनी बैठक में डॉ॰ सिंह को इलाज के लिए दिल्ली भेजने का निर्णय लिया।
भाई अयोध्या सिंह कहते हैं, "भइया (वशिष्ठ जी) बताते थे कि कई प्रोफ़ेसर्स ने उनके शोध को अपने नाम से छपवा लिया, और यह बात उनको बहुत परेशान करती थी. "घरवालों के मुताबिक़ इलाज अगर ठीक से चलता तो उनके ठीक होने की संभावना थी I लेकिन परिवार ग़रीब था और सरकार की तरफ से मदद कम I
जैसी कि उनकी भाभी प्रभावती कहती भी हैं, "हिंदुस्तान में मिनिस्टर का कुत्ता बीमार पड़ जाए तो डॉक्टरों की लाइन लग जाती है. लेकिन अब हमें इनके इलाज की नहीं किताबों की चिंता है. बाक़ी तो यह पागल खुद नहीं बने, समाज ने इन्हें पागल बना दिया."

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