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कँही रथ की डोर, कँही शर्बत, कँही पानी के बोलत लेकर खड़े थे मुस्लिम भाई- ऐसी है राम जी की माया !

कँही रथ की डोर, कँही शर्बत, कँही पानी के बोलत लेकर खड़े थे मुस्लिम भाई !






आखिर कँहा - कँहा राम भक्तो का ऐसा स्वागत हुआ पढ़िये हमारे साथ @ ऐसा देश है मेरा ! 

सबसे पहले चलते है बिहार के हाजीपुर  ?????

रामभक्तो के जुलुश के लिए मुसलमानो ने जगह जगह सजाया शरबत का स्टाल 
प्रेम और सदभाव के नज़ारे को देख हाजीपुर विधायक अवधेश सिंह एवं प्रशासनिक अधिकारी भी गदगद दिखे




जुलुस में शामिल रामभक्तो के लिए मुस्लिम युवाओ ने जगह जगह शरबत के स्टॉल लगाए रखे थे तो भगवा साफा बांधे रामभक्त रामधुन में झूमते दिखे मुस्लिम भाई उन्हें शरबत पिलाते और गले लग बधाई देते दिखे ......
 ख़ास बात ये रही की जिन जगहों पर रामभक्तो के लिए मुस्लिम युवाओ ने  शरबत के स्टॉल लगाए थे। वे संवेदनशील इलाके माने जाते है,जंहा अक्सर धार्मिक फसाद के मामले सामने आते रहे है। रामनवमी को लेकर जंहा प्रदेश में कई जगह तनाव और धार्मिक उन्माद की वजह से प्रशासनिक चुस्ती देखि गई , वंही हाजीपुर में नजारा बिलकुल अलग दिखा।प्रेम और सद्भाव  को लेकर दोनों समुदाय दूरियां को दरकिनार कर गले मिलते दिखे ..हाजीपुर के विधायक अवधेश सिंह,वैशाली के जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान ने इस सामाजिक पहल को सराहा और कहा की सद्भाव का जो सन्देश हाजीपुर के लोगो ने दिखाया है पुरे प्रदेश और देश में जाएगा ...



बोलो सिया राम लला की जय....🙏🙏🙏
अब चलिये बिहार के अररिया  ???💐💐💐

हुआ यूं कि यँहा प्रभु श्रीराम के रथ की बागडोर ही मुसलिम चाचा ने संभाल रखी है।





अभी रथ शहर में ढुकि नहीं कि बाइक जूलूस के आगे कुछ
नौजवान इस तरह से दिखे पानी (बेसलरी) के बोतल के साथ


ऐसा नहीं की ऐसा सिर्फ बिहार में हुआ पुरे भारत मे राम भक्ति का ऐसा ही नज़ारा था। मुस्लिम समाज ने साफ तौर पर अराजकता फैलाने वाले को जबाब दे दिया है।





ह' से हिंदू, "म' से मुसलमान और "हम' से है हमारा हिंदुस्तान... दिवाली के दीयों की रोशनी हो या ईद की सेवइयों का लच्छा, बिना एकता सब बेकार ही हो जाता है। हमारे देश के निर्माण का आधार ही विविधता में एकता है। कोस कोस पर बदले पानी और चार कोस पर वाणी बदलने वाला हमारा देश अपनी तमाम विविधताओं के बावजूद एक है।


राम-रहीम दोनों पूजनीय हैं। गुरु नानक, बुद्ध-महावीर, ईशु सबके वंदना की खुली छूट है। संप्रदाय भले अलग हैं, भारतीयता के नाम पर कोई दुराव नहीं है। रामनवमी का वक्त मर्यादा पुरूषोत्तम राम की पूजा का है जिनके जीवन का आदर्श ही त्याग और बलिदान है। राम नाम जपना काफी नहीं, उनके चरित्र को समाहित करना उनकी सच्ची भक्ति होगी। शांतिपूर्ण माहौल में रामनवमी के त्योहार की आकांक्षाओं के साथ बधाई और शुभकामनाएं।
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