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अब रेलवे फाटक पर नहीं होगी दुर्घटना & बिहार के लाल ने किया ऐसा अविष्कार AUTOMATIC RAILWAY FATAK



अब रेलवे फाटक पर नहीं होगी दुर्घटना & बिहार के लाल ने किया ऐसा अविष्कार AUTOMATIC RAILWAY FATAK 




बिहार के अवधेश कुमार उर्फ जुम्मन मिस्त्री  ने कुछ ऐसा ही कमाल कर के दिखा दिया है जिससे अब रेलवे फाटक पर पर कभी कोई दुखद दुर्घटना नहीं होगी ! उन्होंने बना दिया है एक कमाल का 
रेलवे फाटक जो ट्रेन के आने से पहले आटोमेटिक बंद हो जाएगी और जाने से पहले आटोमेटिक 
खुल जाएगी !  इसे तैयार करने में 60 हजार रुपये खर्च हुए हैं। छह माह का समय लगा। इसमें एक बैट्री, साइकिल के व्हील, चेन के साथ अन्य सामान की मदद ली गई है!





उनका ये अविष्कार रेलवे के लिए वरदान साबित हो सकता है आपको बता दे पिछले १० वर्षो से 
लगभग हर वर्ष रेलवे फाटक के बजह से या मानवीय  भूल के बजह से एक या दो रेलवे एक्सीडेंट 
जिसमे हजारो निर्दोष यात्री की जान चली जाती है , हमारे रेलवे का इन्फ्रास्ट्रक्चर  कुछ ऐसा है 
की अभी भी करीब २००० से ज्यादा रेलवे फाटक है जिसमे से करीब ३०० से ४०० फाटक पर काम 
करने के लिए रेलवे कर्मचारी नहीं है , ये तो हम वैध रेलवे फाटक की बात कर रहे थे इसके आलबे 
न जाने कितने रेलवे  फाटक ऐसा है जिसकी गिनती रेलवे के पास नहीं है अवैध रूप से लोगो द्वारा 
बनायीं गयी है , हालाँकि उनके इस अविष्कार से रेलवे के अवैध फाटक पर तो दुर्घटना नहीं रोका जा सकता , बिहार डेलीगेशन ऐसे सभी लोगो से निवेदन करेगा कृपया अवैध रेलवे फाटक का निर्माण न करे !


 


लेकिन जुम्मन का यह निर्माण इसलिए भी वरदान साबित हो सकता है क्युकी ये काफी किफायती होगा महज ६० हजार रूपए में तैयार हो जायेगा , अगर इसके बदले रेलवे पूल की बात करे तो मौजूदा एस्तिथि में अगर एक रेलवे पुल बनाते है तो कम से १० लाख तक का खर्च आएगा ! अगर 
मानव के निगरानी में रेलवे फाटक का बंद- खोल कार्य सौपा जाता है फिर भी एक रेलवे कर्मचारी की तनखा लगभग २० हजार प्रति महिना का बैठता है ऐसे में अगर ये जुम्मन वाली फाटक का योजना अगर सफल हो जाती है तो रेलवे के बजट से बचे पैसे से अवैध वाले फाटक के निर्माण का 
भी कार्य किया जा सकता है !


फ़िलहाल किस कंहा  तक पहुची है यह योजना ?


फिलहाल उनके इस प्रोजेक्ट को देखने दानापुर रेलवे मंडल के अध्यक्ष खुदा आये हुए थे उन्होंने मिडिया से बात - चीत में कहा कि इस मॉडल में मेकनिकल सेंसर व डिजिटल सेंसर लगाकर इसे विकसित करने की जरूरत है। इस प्रोजेक्ट को रेलवे के रिसर्च सेंटर लखनऊ भेजा जाएगा। विभाग द्वारा मॉडल का चयन होने पर कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा।



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