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किसी भी भाषा के निर्माण का मुख्य उद्देश्य विन्रमता के साथ सम्प्रेषण (commnication ) के लिए होता है।


जो व्यक्ति हिदुस्तान में पैदा हुआ ,हिंदी में पला बड़ा, पूरे जीवन काल मे हिंदी के 1.5 लाख शब्दों को न जान सका। अगर वे दो चार अंग्रेजी के किताब पढ़ के अंग्रेज होन दावा करें तो एक बात समझ मे नहीं आती उस शख्स ने अंग्रेजी के 12.5 लाख शब्द कैसे जान लिया।

किसी भी भाषा के निर्माण का मुख्य उद्देश्य विन्रमता के साथ सम्प्रेषण (commnication ) के लिए होता है। ऐसे में अगर वो  व्यक्ति अगर महज रोब जमाने के लिये ऐसी भाषा का प्रयोग करता है जो सामने सुन रहे व्यक्ति के समझ से पड़े है। तो इसका ये मतलब नहीं की सामने सुन रहे व्यक्ति से आप ज्यादा जानते है अपितु आप के तरफ़ से गलत सम्प्रेषण हुआ हैं। अभी आप को सम्प्रेषण (communication ) इतना भी नहीं जानते ,जितना एक नवजात शिशु अपने माँ से दूध के लिये करता है।  chandan patel

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