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PAIN OF A FARMER -आप किसानो लिए असली हीरो है !

PAIN OF A FARMER - आप किसानो लिए असली हीरो है ! 

ओ हो ...... गे माइयो , कइसन भुटा होईले
एक गो दाना नई छई , मन करइ छई ये हसिया
से गर्दन काट लिऐ मन , मन करइ छई
धार में कूद के जान दे दिए .........

गुस्से में मुँह से कुछ अप शब्द .......

और फिर नदी के और भागना .....



सबसे पहले तो आप की वीडियो देख कर लगता नहीं की या एक फ्रैंक वीडियो है हम ये दावे के
साथ कह भी नहीं रहे की वीडियो हकीकत है या फ्रैंक , वीडियो देखने से ऐसा लगता है की बिलकुल सच्ची है ,वैसे हम अपनी या रिपोर्टिंग एक फ्रैंक वीडियो मान कर ही कर रहे है अगर वीडियो बाद असली निकले या हमारी रिपोर्टिंग से किसी को आहत हो तो हमके से लिए पहले से नमस्तक है और माफ़ी मांग रहे है !
रिपोर्टिंग ----------
आप ने जिस तरह से महज एक मिनट के वीडियो ( फ्रैंक ) में किसानो के दर्द को रखा है !
अकल्पनीय है , अतुलनीय है यु तो हमारी धरती बेहतरीन कलाकारों से भड़ी पड़ी है ,लेकिन
आज आप ने उन सभी कलकारों को पीछे छोड़ दिया है , हमारा मकसद की कलाकार के कला
का अपमान  करना बिलकुल नहीं है लेकिन तुलनात्मक की बात करे तो आप का अभिनय बेहतरीन था , आप ने बिलकुल सही लोकेशन का चुनाव किया , जो की आप के  स्क्रिप्ट के
हिसाब ,बर्बाद हो चुकी मक्के के खेत , हसिया , पास में नदी , एक दर्द भरी आवाज .......

ओ हो ...... गे माइयो , कइसन भुटा होईले                      Oh! God, Oh Mom , How are these corn?
एक गो दाना नई छई , मन करइ छई ये हसिया               Not of single grain , I am getting Upset and
                                                                                   Want to die himself with Mustache.....
से गर्दन काट लिऐ मन , मन करइ छई                           Running Toward River to die Himself ..
धार में कूद के जान दे दिए .........

गुस्से में मुँह से कुछ अप शब्द .......

और फिर नदी के और भागना .....






एक किसान की पूरी वयथा कह जाती है किसी तरह आप ने महज १ मिनट के वीडियो
कह दिया , किस तरफ से एक किसान कर्ज लेकर , अपनी अरमानो का गाला घोट कर
मैले - कुचैले कपडे पहन कर , नंगे पाओ चल कर एक उम्मीद का बीज बोता है वो भी
बईमान मौसम के साथ जुआ खेल कर , ऐसे में कुदरत भी धोका , अभी तो फसल आने के
बाद कालाबाजारी होना बाकि होगा , फिर न्यूतम मूल्य , समर्थन मूल्य वाली राजनितिक
भी अभी बाकि है ......ऐसे में एक किसान करे तो क्या एक आखिरी रास्ता बचता है , आत्महत्या !
अगर आत्महत्या नहीं करते तो बैंक वाले , कर्जदार जीते जी मार देते है , बदन पर मैले - कुचैले कपडे जो की अब फट चुके है , अब उसके लिए कहा से पैसे आयंगे , किसान का
भी एक स्वाभिमान है मर्ज जायँगे पर भीख नहीं मांगे गे , सोच कर देखो एक जो अन्न दाता
है I जो हमारे भोजन का प्रबंध करता है उसे भीख देते हमारा हाथ नहीं कॉपी गा क्या ?

अतः आपके इस  हकीकत और दर्द के नाम बिहार डेलीगेशन अपना पेज आज के लिए करना
चाहे गा !

नोट - हमारा पोस्ट कंही से आत्महत्या को बढ़ावा नहीं देता हमने सिर्फ किसानो की दर्द बताने का प्रयाश किया है , आत्महत्या समाधान नहीं है , हमें कुछ और समाधान ढूँढना चाहिए इस समस्या का !



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