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हल्ला बोल : उन साम्प्रदायिक सौहाद्र बिगाड़ने तत्वों के खिलाफ ।



हल्ला बोल : उन साम्प्रदायिक सौहाद्र बिगाड़ने तत्वों के खिलाफ ।


क्या कँहा होगा मंगल पांडेय ने अपने साथियों को , इस देश वालो को हिंदु को ,मुसलमानों को, की तुम मेरी मूर्ति किसी चौराहे पर लगा कर ख़ुद टूट जाना, भूल जाना की किसी ने हमें तोड़ने की गहरी साजिश की है ,  क्या हुआ था उस दिन 29 मार्च 1857 को जब मंगल पांडेय सिर्फ गाय की ही बनी चमड़ी नहीं सुअर की भी चमड़ी से बने कारतूस को भी चलाने से मना कर दिया, गोरी चमड़ी वाली अंग्रेजी हुकमत ने तो साज़िश किया था की हिंदु मुसलमान टूटे लेकिन उनका दाव उल्टा पर गया हिन्दू मुसलिम ने एकता का ऐसा परिचय दिया की अंग्रेज अपने द्वारा खोदे गए गड्ढे में सिर्फ गिरे बल्कि वो गढ्ढा उनके लिए कबर बन गई, सिपाहियों का यह विद्रोह अब कँहा रुकने वाली थी विद्रोह का अन्त भारत में ईस्ट इंडिया कम्पनी के शासन की समाप्ति के साथ हुआ।लेकिन आज क्या हो रहा हिन्दू -मुसलमान को तोड़ने की कोई कोशिश करता है  ऐसे टूटते है मानों मानो रेत में बनी दीवार , सवाल वही है की हम इतने कमजोर कैसे हो गए की अंग्रेज के बनाये व्हाट्स अप और फेसबुक से टूटने लगे है। उस समय तो हम गुलाम थे अब हम आजाद है फिर भी इतने कमजोर क्यों है ? है जबाब ? हॉ है बिल्कुल है उस समय हम उन साम्प्रदयिक ताकत से लड़ते थे औऱ आज ख़ुद आपस मे लड़ते है। वैसे ही जैसे हम बच्चें थे औऱ स्कूलों में चार पाँच मित्र मिल कर पीछे से किसी एक मित्र को गुदगुदी कर देते थे औऱ जब वह पूछता था किसने किया तो ऐसे मित्र का नाम बता दो जो इस मे शामिल नहीं है फिर बैठ कर मजे लो अपनी शरारत का ।ठीक ऐसे ही मजे ले रहे है आज कुछ शरारती तत्व आज फिर जरूरत है उन साम्प्रदायिक सौहाद्र बिगाड़ने तत्वों के खिलाफ हल्ला बोलने का याद रखिये अंग्रेजों ने सिर्फ 8 अप्रैल 1857 को मंगल पांडेय के तन को फाँसी दिया था मन को नहीं आज भी उनका मन कटोचता होगा जब हम आपस मे लड़ते है। बंदे मातरम, जय माँ भारती 💐💐💐💐💐 chandan patel

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