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Happy mother's day



Happy mothers day ? ये आपलोगों के लिए है। हमने तो सिर्फ माँ को तकलीफ में ही देखा है। मुझे जन्म देने में माँ को कितनी तकलीफ हुई होंगी, मुझे नहीं पता । मैं झूठ क्यों बोलू जन्म से चार - पाँच साल की बात किसे याद रहता जो मुझे याद होगा ये बात तो हम जब वयस्क हुए तब पता लगा की जब एक माँ अपने बच्चे को उसे 57 del ( del दर्द मापने की इकाई ) के बराबर दर्द होता जो की मनुष्य के दर्द सहने की अधिकतम क्षमता 45 del से भी 12 इकाई ज्यादा है या यूं समझ लीजिए की आपकी शरीर के 20 हड्डियां एक बार मे तोड़ दी गयी हो  इतना दर्द , भगवान न करें लेकिन आपकी शरीर के बीस हड्डियां जब टूटेगी जब आप किसी भयंकर हादसे का शिकार होंगे निश्चिंत रहिये माँ जिनता दर्द आप जीवन मे कभी नहीं मिलेगा। लगभग एक सौ दस वर्ष पहले maxim gorky जो की रसियन थी उन्होंने ने एक नोबेल लिखा था The Mothers उन्होंने एक माँ के व्यक्तित्व का वर्णन की था जो एक फैक्ट्री में काम करके अपने बच्चे का व्यक्त्वि कैसे किन -किन समस्यों का सामना कर के निखारने में लग जाती है । अपनी पति के बुरे लत को देख चुकी एक माँ का बच्चा जब बुराई की बढ़ने लगता है तो एक माँ को कितनी तकलीफ होती होगी । जीवन के भाग दौड़ से वक्त मिले तो सोचियेगा । maxim gorky की mothers आज भी ऐसी ही दिखती । माँ क्या है इसका अहसास मुझे व्यक्तिगत तौर पर तब हुआ जब वैसाख के महीने स्कूल के छुट्टी  में मेरी माँ बाल ( भुट्टा - cron) की टाल छिलने के लिए पास के ही मामा जी के खेत मे लेकर गयी थी , टेम्परेचर कँही 40- 42 बीच रहा होगा । हम भी एक - आध बाल छिल कर देखें उम्र 8- 9 के बीच रही होगी हाथ के साथ - साथ दाँत प्रयोग करके जैसे भी छिले लास्ट में घर लौटे अपने हिस्से की मजदूरी लेकर कुछ पाँच किलो के आसपास हमारे घर मे भी मकई के भुट्टे आ गए। शायद उस समय भी लेश - कैश की सुविधा थी , तभी बगल वाले नाना जी ने भुट्टो के बदले राशन की कुछ सामान दे दिया होगा । अभी तक शायद पापा ने दिल्ली से पैसे नहीं भेजे होंगे तभी मेरे माँ को दूसरा काम पकड़ना पड़ा पड़ोस के नाना जी गाय के गोबर को इकठ्ठा कर के गोहड़ा - गोइठा ठोकने का काम अधिया ( ठेका - tender )  पर लिया पूरा तीन महीने में गोरहा तैयार हुआ 100 रुपये में बिके जो मेरे school फीस के रूप जमा हुई । एक महीने का स्कूल फीस 25 रुपये थे चार महीने तक हमें गुरु ने जी उधार पढ़ाया होगा । मुझे याद नहीं की उन्होंने कभी मुझे बोला हो की आप अपने पेरेंट्स को बोलना की exam fee जमा करा दे या कभी दोहरा व्यवहार किया हो आज के जमाने मे तो कानून बनाने पर रहे है इस विषय पर। मुझे जन्म देने में मेरी माँ को कितना अहसास हुआ होगा ये तो मुझे जब पता लगा जब मैं पिता बनने के दौर में था । पत्नी जी उम्मीद से थी पूरे 9 महीने में कभी कमर दर्द , कभी सर दर्द, वैसे तो महीने के 9 तारीख को ग्यानी जी से मिलना अनिवार्य था उन्होंने हमसे पहले महीने ही कमिटमेंट करवा लिया था लेकिन हम 9 तारीख को तो जाते ही थे बाकी ऐसा कोई हफ्ता नहीं बिता हो जब उनके दर्शन करने नहीं जाना पड़ता । दिन रात कभी भी चैन की नींद सोना तो छोड़िए झक भी नहीं मार पा रहा था । शायद ऐसी ही तकलीफ हुई होगी मेरे माता - पिता को जब हमें जन्म देने की योजना बनायी होगी उन्होंने। अब जब पैसे की आर्थिक तंगी खत्म हो गयी है तो माता - पिता शाररिक समस्या से जूझ रहे है। मेरी माँ को आंखों , एसिडिटी , की समस्या अभी भी तकलीफ दे रहीं है डॉक्टर बाबू कहते है ये बढ़ती उम्र का परिणाम है ।आज भी माँ की तबियत खराब है सर्दी खाँसी ने उन्हे बुरी तरह जकर रखा है डॉक्टर कह रहे दो तीन बाद आराम मिलेगा अब आप ही बताओ हम haapy mothers day कैसे कहें mother तो तकलीफ में है। Chandan Patel बिहार डेलीगेशन

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