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बिहार की राजनीति में इन दिनों उबाल , चल रही ‘भाई-भतीजा’ की सियासत

Patna : लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सीट के बंटवारे पर जहां एनडीए में हायतौबा मची है तो वहीं महागठबंधन में भी अब सीटों के बंटवारे पर सरगर्मी बढ़ने लगी है। बिहार में इन दिनों ‘भाई-भतीजा’ की सियासत चल रही है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद द्वारा अपने बड़े पुत्र के बजाय छोटे बेटे को अपनी पार्टी की ओर से सबसे प्रमुख और राज्य के उपमुख्यमंत्री के रूप में पेश किया जाना भले ही औरों को अजीबो-गरीब लगे। लेकिन सच यही है कि जब चारा घोटाला मामले में प्रसाद को जेल हुई तब वे तेजस्वी ही थे, जिन्होंने हिम्मत नहीं हारते हुए अपनी पार्टी का नेतृत्व किया था।

ताजा बात करें तो खुद राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक राष्‍ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा ने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) सुप्रीमो व मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार को बड़ा भाई बताया है। मृदुल भाषी तेजस्वी यादव की सबसे बड़ी खासियत उनका व्यक्तिगत व्यवहार और सरल व स्पष्ट भाषा में जनता से संवाद स्थापित करना है।
इन्डियन प्रीमियर लीग खेल चुके एक क्रिकेटर से नेता बने तेजस्वी ने राजनीति में आते ही हड़कंप मचा दिया था। बिहार में लोकसभा चुनाव को ले राजनीति परवान पर है। राजग के साथ विपक्षी महागठबंधन में भी प्रेशर पॉलिटिक्‍स चरम पर है। एक-दूसरे पर तंज कसने का सिलसिला भी तेज है। निशाने पर सभी बड़े नेता हैं।
बहरहाल, बीते आठ नवंबर को चुनाव परिणाम आने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया था कि उपमुख्यमंत्री का पद राजद के खाते में जाएगा। लेकिन साथ ही कयासबाजियों का दौर भी लगातार चलता रहा। इस रेस में राजद प्रमुख की बेटी तेजस्वी यादव, डॉ. मीसा भारती और अब्दुल बारी सिद्दीकी सबसे आगे रहे।बिहार कांग्रेस के कार्यकारी अध्‍यक्ष कौकब कादरी ने कहा कि राजग में कब कौन बड़ा और कौन छोटा भाई बन जाता है, पता नहीं रहता।
SOURCE - MAI BIHARI

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