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काशी में बना विश्व का पहला भोजपुरी माई का मंदिर, अब स्थापित होगी 108 फीट की प्रतिमा


भोजपुरी बोली अब वैश्विक स्वरूप की ओर अग्रसर है। बिहार और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में बोली जाने वाली लोकप्रिय बोली को अब यहां के लोगों की जननी और एक पालनकर्ता के तौर पर मान और सम्मान मिल रहा है। बोली का रखा मान, भोजपुरी माई का सम्मान लाइन को सही साबित करते हुए बीते दिनों काशी के बड़ा लालपुर में जीवनदीप पब्लिक स्कूल में भोजपुरी माई का मंदिर स्थापित किया गया है। अब काशी में 108 फीट ऊंची भोजपुरी माई की प्रतिमा स्थापित होनी है। प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दौरान इसका भी शिलान्यास हो सकता है।

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दरअसल इस वर्ष प्रवासी भारतीय दिवस में, मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ भी शामिल होने के लिए आ रहे हैं। उनका मूल निवास स्थान यूपी के बलिया जिले में है। इन दिनों जिला प्रशासन उनके गांव की भी पड़ताल करने में जुटा हुआ है। मॉरीशस और फिजी जैसे देशों में भोजपुरी बोली काफी व्यापक स्तर पर बोली जाती है। यहां कभी पूर्वांचल और बिहार से मजदूर बनकर गए लोगों ने भोजपुरी को और समृद्ध करने का काम किया है।
भोजपुरी, प्रवासियों को हिंदुस्तान से जोड़ती है। चूंकि यह आयोजन इस बार भोजपुरी बेल्ट में हो रहा है, लिहाजा भोजपुरी बोली को भी आयोजन में खासा महत्व दिया जा रहा है। बनारस में स्थापित की गई भोजपुरी माई की मूर्ति संभवत: विश्व की पहली प्रतिमा है, जो किसी बोली को समर्पित की गई है। इसे मॉरीशस के सहयोग से स्थापित किया गया है। इसके बाद से यहां प्रतिमा पर नित्य माला फूल चढ़ाने के साथ ही भोजपुरी माई की प्रतिमा के पूजन का दौर भी शुरू हो चुका है।

बाबतपुर में स्थापित होगी 108 फीट ऊंची प्रतिमा
मॉरीशस के उच्चायुक्त ने अपने दौरे में 108 फीट की भोजपुरी माई की प्रतिमा स्थापित करने की बात कही थी। इस प्रतिमा को बाबतपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पास बनने वाले प्रवासी भवन में स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने 108 फीट की भोजपुरी माई की प्रतिमा लगाने की चर्चा को बल देकर बोली को मां के तौर पर मान्यता दिलाने की भी कवायद काशी से शुरू की है।

प्रवासी भवन के लिए जमीन चिन्हित
बड़ागांव स्थित राजकीय कन्या जूनियर हाई स्कूल, काफी वर्ष पूर्व बन्द हो जाने के बाद से उसकी जमीन खाली पड़ी थी। इस खाली जमीन पर प्रवासी भवन बनवाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था। सरकार ने यहां दो एकड़ जमीन, प्रवासी भवन के लिए चिन्हित भी कर ली है। जमीन का अवलोकन मंत्री नीलकंठ तिवारी सहित जिले के आलाधिकारी भी कर चुके हैं। इसके बाद उम्मीद की जा रही है कि प्रवासी भारतीय दिवस के दौरान यहां शिलान्यास कर निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है।
बलिया जिले में प्रशासन इन दिनों, मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ के वंशजों की तलाश कर रहा है। बीते दिनों मॉरीशस के उच्चायुक्त ने बलिया जाकर प्रशासन को इस बात से अवगत कराया था। प्रवासी भारतीय दिवस पर बतौर अध्यक्ष शामिल होने आ रहे प्रविंद जगन्नाथ के वंशज बलिया से जुड़े रहे हैं। लिहाजा वाराणसी में 21-23 जनवरी तक आयोजित होने वाले प्रवासी भारतीय सम्मेलन के दौरान वह अपने पूर्वजों की माटी को भी नमन करने जाएंगे। इसी तरह आयोजन में कई ऐसे लोग भी शामिल होंगे जिनकी बुनियाद न सिर्फ पूर्वांचल की धरती होगी, बल्कि उनकी विदेशी जुबान भी भोजपुरी होगी।
SOURCE - APNA BIHAR

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