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मुजफ्फरपुर में आज भी जिन्दा है खुदीराम बोस कि यादे ,हासी हसी परिबो फांसी

शहीद खुदीराम बोस की १३०वी जयंती कल पूरे देश में मनाई गई | मुजफ्फरपुर के कंपनी बाग़ में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के पहले बम  विस्फोट करने वाले महज़



शहीद खुदीराम बोस की १३०वी जयंती कल पूरे देश में मनाई गई | मुजफ्फरपुर के कंपनी बाग़ में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के पहले बम विस्फोट करने वाले महज़ १८ वर्ष के शहीद खुदीराम बोस की कल १३०वी जयंती मनाई गई और प्रत्येक वर्ष ११ अगस्त को मुजफ्फरपुर केंद्रीय कारागृह में उनके शहादत दिवस पे कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है ,जहाँ उन्हें फांसी की सजा हुई थी । उन्होंने अपने आखिरी समय में यह कहा था “हासी हसी परिबो फांसी”।
देश उनके बलिदान को कभी नहीं भूला सकता पिता त्रैलोक्य नाथ बोस और माता लक्ष्मी प्रिया बोस के घर ३ दिसंबर १९८९ को जन्मे खुदीराम बोस की धमनियों में जैसे रक्त की जगह राष्ट्रभक्ति बहती थी। शहीद खुदीराम बोस के जयंती के अवसर पे उनके गांव हबीबगंज, मिदनापुर (पश्चिम बंगाल) में जहाँ उनका जन्म हुआ था और जहाँ से वो अपने मकसद को पूरा करने के लिए मुजफ्फरपुर आये थे, वहां आज जश्न का माहौल है। जिस कमरे में उनका जन्म हुआ वो आज १३० दीयों से जगमगाएगा उनके गांव के लोग सामूहिक उत्सव मना रहे है ।

जयंती उत्सव के दौरान ही केक भी काटा गया । उसी कमरे में आज हबीबगंज के लेखक अरिंदम भौमिक द्वारा शहीद खुदीराम बोस पे लिखी पुस्तक “कौन खुदीराम” का सोमवार को लोकार्पण होना है। जो की शहीद खुदीराम बोस की बहन अपरूपा देवी के नाती सुब्रतो राय करेंगे पुस्तक बांग्ला भाषा में लिखी गयी है। अरिंदम भौमिक के अनुसार, जल्द ही इस पुस्तक के हिंदी संस्करण को तैयार किया जाएगा। और इसका लोकार्पण मुजफ्फरपुर में ही किया गया । लोकार्पण में अपने साथियों के साथ शहर में आए लेखक ने आगे बताया की, यह पुस्तक तक़रीबन दस साल के अनुसन्धान के बाद लिखी गयी है। विशेष बात यह है की अरिंदम ने मुजफ्फरपुर से जुड़े क्रन्तिकारी खुदीराम बोस के जीवन के अनछुए पलों को सामने रखा है। 30 अप्रैल सन 1908 को शहर के कंपनीबाग में बम विस्फोट कर अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला देने वाले अमर शहीद खुदीराम बोस से जुड़ी सभी यादें मुजफ्फरपुर सेंट्रल जेल में आज भी संरक्षित हैं

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