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क्या ये सत्य है की कृष्ण चरित्रहीन थे, उन्होंने गोपियों के साथ खूब रंगरेलिया मनायी

क्या ये सत्य है की कृष्ण चरित्रहीन थे, उन्होंने गोपियों के साथ खूब रंगरेलिया मनायी 

कृष्ण ने मात्र 11 वर्ष की आयु में वृंदावन छोड़ दिया था। एक 11 वर्ष के बालक का जो रिश्ता गोपियों से रहा होगा उसे गलत रूप में देखना सर्वथा अनुचित है। वह रिश्ता एक भक्त और भगवान के रिश्ते के तुल्य था।
कृष्ण की आधिकारिक तौर पर केवल 8 पत्नियां थीं। उन्होंने 16100 महिलाओं को अपनी रानी का दर्जा देने का फैसला किया जिन्हें नरकासुर ने अपहरण कर लिया था और शायद उनका भी बलात्कार किया गया था। उन्होंने उन महिलाओं से केवल इसलिए शादी की क्योंकि कोई भी उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था। आज के समय में, अगर कोई पुरुष किसी बलात्कार पीड़िता से शादी करता है तो क्या आप उसे चरित्रहीन मानेंगे? यदि नहीं, तो कृष्णा के चरित्र पर सवाल उठाने का कोई सवाल ही नहीं है।
  • कृष्ण ने पांडवों का पक्ष लिया और कौरवों से पक्षपात किया।
अगर ऐसा था तो उन्होंने अपनी सर्वश्रेष्ठ नारायणी सेना में से दो अक्षोहिणी सेना जिसमे से प्रत्येक में 10 मिलियन से अधिक योद्धा थे, कौरवों को क्यों दी? कृष्ण के अधिकतर रिश्तेदार इसी सेना में थे। इसमे से एक अक्षोहिणी सेना सात्यकी के अधीन थी जिसने बाद में पांडवों के साथ रहने का फैसला किया, यह उसका निर्णय था कृष्ण का नहीं और सात्यकि ने अपने अधीन सेना का उपयोग नही किया और यह सेना कौरव सेनापति कृतवर्मा के अधीन रही। इस प्रकार इस पराक्रमी सेना का लाभ केवल दुर्योधन को मिला।
  • कृष्ण ने द्रौपदी को कर्ण को अस्वीकार करने की सलाह दी।
संभवतः यह बेवकूफ धारावाहिक निर्माताओं द्वारा बनाई गई सबसे बड़ी गलत धारणा। जहां तक ​​महाकाव्य का कहना है, कृष्ण ने द्रौपदी के निजी जीवन में कभी हस्तक्षेप नहीं किया। महाभारत के BORI संस्करण में स्पष्ट रूप से राधा के पुत्र वसुसेना कर्ण का उल्लेख किया गया है, जो उन राजकुमारों में से एक थे जो अपने स्वयंवर में विफल रहे थे। बेशक, कुछ संस्करण ऐसे हैं जो कहते हैं कि द्रौपदी ने उन्हें अपनी जाति के कारण अस्वीकार कर दिया था। वस्तुतः द्रौपदी अपने स्वयंबर से पहले कृष्ण से कभी नहीं मिली, इसलिए कृष्ण को यहां जोड़ना गलत है।
  • कुरुक्षेत्र युद्ध के लिए कृष्ण जिम्मेदार थे।
यह गलत धारणा गांधारी के अलावा और किसी ने नहीं बनाई थी। उन्होंने अपने भाई और बेटों के बुरे कर्मों को नजरअंदाज किया और कृष्ण को उनकी मृत्यु का दोष देने का काम किया। केवल कृष्ण ने ही अंतिम समय तक भी युद्ध को रोकने की कोशिश की। वह शांति प्रस्ताव के साथ हस्तिनापुर गये और पांडवों के लिये मात्र 5 गांवों की कीमत पर भी युद्ध को रोकने की कोशिश की। बताइये कहाँ पर है उनका दोष?
  • वह भगवान विष्णु के पूर्ण अवतार थे।
यें वो हैं जो इस पृथ्वी की ही नही बल्कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड की रक्षा और संचालन करते हैं। वें वो हैं जिन्होंने समय समय पर अपने भक्तों और धर्म की रक्षा के लिये इस धरती पर अवतरण लिया।जब कुरु वंश के सभी शक्तिशाली योद्धा, द्रौपदी के चीरहरण के दौरान स्तब्ध रह गए, यह कृष्ण ही थे जिन्होंने उनकी गरिमा को बचाया।
जब तक आप पूरी तरह से सनातन धर्म के खिलाफ नहीं हैं, आपको उनमें कोई त्रुटि नजर नही आयेगी । एक दफा सूर्य के बगैर इस ब्रह्मांड की कल्पना की जा सकती है किंतु श्रीकृष्ण में दोष की कल्पना नही की जा सकती।
जय श्रीकृष्ण।

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