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Vashishth Narayan Singh नहीं मिला वो सम्मान जिनके वे हक़दार !।। vashisth ...

Vashishth Narayan Singh नहीं मिला वो सम्मान जिनके वे हक़दार !।। vashisth ...

  

NASA में एक मिशन चल रहा था। अचानक 30 Computer फेल हो गए। वहां मौजूद एक शख्स ने लिखकर सटीक गणना कर दी। वह कोई और नहीं Vashisth Narayan सिंह थे। वे सचमुच वशिष्ठ थे। विशिष्ट थे। बिहार के छोटे से शहर आरा में जन्मे थे। वे Bihar के गौरव थे। देश की शान थे।
पटना के PMCH में गुरुवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। देश के जानेमाने गणितज्ञ की मौत ने एक ऐसा हीरो खो दिया जो नई इबारत लिख रहा था। गणना की। गणित की। आंइस्टीन के मास, लेंथ और टाइम के सिद्धांत को इस गणितज्ञ ने चुनौती दी थी। Patna के पीएमसीएच Hospital ने उनकी मौत का तमाशा बना दिया। उनके भाई एंबुलेंस के लिए भटकते रहे। 
संवेदनहीनता की पराकाष्ठा देखिए- अस्पताल प्रशासन ने कहा कि उनका घर पास ही था। लिहाजा वो शव को ले जाएं। यह पहली बार नहीं था। पीएमसीएच में उनका इलाज भी बहुत लापरवाही से चल रहा था। वे गुमनामी में जी रहे थे। उनकी मानसिक स्थिति खराब थी। बिहार की माटी में हीरे निकलते हैं। अफसोस यह है कि इन हीरों को हम न पहचानते हैं। न ही कद्र करते हैं। कद्र होती भी है तो मौत के बाद।
अब श्रद्धांजलियों की बाढ़ आ रही है। संवेदानाएं शून्य हो जाती हैं। ऐसा ही कुछ पिछले कई सालों से वशिष्ठ बाबू के साथ हो रहा था। उन्होंने पहचानना बंद कर दिया था। हम तो पहचानते थे। लोग उनके किस्से बहुत गर्व से बताते हैं। यह गर्व की बात भी है। वे न केवल बिहार की बल्कि पूरे देश की थाती थे। बर्कले यूनिवर्सिटी ने उन्हें जीनियसों का जीनियस ऐसे ही नहीं कहा था।
अस्पतालों में अब संवेदनाएं नहीं बचीं यह हम जानते हैं। लेकिन हम अपनी धरोहरों को मौत के बाद सम्मान भी नहीं दे पाते। वशिष्ठ नारायण जैसे लोग यदाकदा ही इस दुनिया में आते हैं। हमें ऐसे महान पुरुषों को संभालना होगा। उनकी मौत का तमाशा न बने यह सोचना होगा। धंसे हुए सिस्टम को सुधारना होगा। उबारना होगा। नहीं तो ऐसे ही मौत का तमाशा बनता रहेगा। हम अफसोस जताते रहेंगे।

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