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इन अभिलेखों के बारे में Railway Group D || NTPC Exam में पूछे जाने की संभावना है |

इन अभिलेखों के बारे में Railway Group D || NTPC Exam में पूछे जाने की संभावना है |

अक्सर railway group d ,ntpc ,ssc banking जैसे exam में अभिलेखों Abhilekho ( Record ) सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते है | हम आप के लिए इस पोस्ट में इन्ही अभिलेखों से जुडी महत्वपूर्ण Question Answer लेकर आये है जो की आपके आने वाले एग्जाम के लिए Important General Knowledge हो सकता है |


कुछ और महत्वपूर्ण तथ्य 

*अभिलेखों के अध्यन को इपिग्राफी Epigraphy कहते है |
*अभिलेख बोगाज - कोई जिसे Asia Minor के नाम से भी जाना जाता है - इसमें वैदिक देवता मित्र ,वरुण ,इंद्र ,नसत्य ( अश्वनी कुमार ) के बारे में जानकारी मिलती है | 
*भगवत धर्म के विकसित होने का प्रमाण गरुड़ सतम्भ में है - इसकी ख़ोज यवन राजदूत होलिओडेरस ने किया था |
*भारत वर्ष का जिक्र हाथी गुम्फा अभिलेख में है 
*सर्वप्रथम भारत पर होने वाली हूर्ण आकर्मण की जानकारी भितिरी अभिलेख में है |यह स्कंदगुप्त का भितरी स्तंभ लेख, जूनागढ़, शिलालेख से संबधित है |
*सति प्रथा के बारे में जानकारी एरण अभिलेख से पता चलता है | इस समय भानु गुप्त का शासन था |
*रेशम बुनकर के बारे में मंदसौर अभिलेख में जानकारी मिलती है |

पुरातत्विक स्रोत (Archaeological Sources )


अभिलेख (Records ): 
* प्रशस्तियों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण अभिलेख समुंद्रगुप्त का प्रयाग प्रशस्ति अभिलेख हैं जिसमे समुंद्रगुप्त की विजयों और नीतियों का पूर्ण विवेचन मिलता हैं 
*इसी तरह के अभिलेखों के अन्य उदहारण कलिंगराज खारवेल का हाथीगुम्फा अभिलेख 
*गौतमी बलश्री का नासिक अभिलेख,
* रुद्रदामन का गिरनार शिलालेख, 
*बंगाल के शासन विजयसेन का देवपाडा अभिलेख,
*चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्रितीय का ऐहोले अभिलेख हैं।

अभिलेख
शासन
विषय
हाथी गुम्फा अभिलेख
खारवेल
उसके शासनकाल की घटनाओ का क्रमबद्ध विवरण
जूनागढ़ (गिरनार ) अभिलेख
रुद्रदामन
इसके विजयो एवं व्यक्तित्व का विवरण
नासिक अभिलेख
गौतमी बलश्री
सातवाहन कालीन घटनाओ का विवरण
प्रयाग स्तम्भलेख
समुंद्रगुप्त
उसके विजयों एवं नीतियों का वर्णन
ग्वालियर अभिलेख
भोज प्रतिहार
गुर्जर प्रतिहार शासकों के विषय में जानकारी
मन्दसौर अभिलेख
मालवा नरेश यशोवर्मन
सैनिक उपलब्धियों का वर्णन
ऐहोले अभिलेख
पुलकेशिन द्रितीय
हर्ष एवं पुलकेशिन - II के युद्ध का विवरण
स्मारक और भवन (Monuments & Building):बुर्ज होम से गढ़ा घर मिला था आपको बता दे | प्राचीन काल में भारत में भारी संख्या में भवनों का निर्माण हुआ। इन भवनों के अधिकांश अवशेष सम्पूर्ण देश में बिखरे अनेकानेक टीलो के नीचे दबे हुए हैं। महलों और मंदिरों की शैली से वास्तुकला के विकास पर पर्याप्त प्रकाश पड़ा हैं। उत्तर भारत के मंदिरों की कुछ अपनी विशेषताएं हैं तथा उनकी कला की शैली ' नागर शैली ' कहलाती हैं एवं दक्षिण भारत के मंदिरों की कला शैली ' द्रविड़ शैली ' कहलाती हैं जिन मंदिरों के निर्माण पर नागर शैली एवं द्रविड़ शैली दोनों का प्रभाव पड़ा हैं वह ' वेसर शैली ' कहलाती हैं।
सिक्के (Coins) :  पुरातात्विक साक्षयों में सिक्के का विशेष स्थान हैं। सिक्को के अध्ययन को मुद्राशास्त्र (न्यूमिस्मेटिक्स) कहते हैं।प्राचीन सिक्के  को आहात कहते थे | इसी को साहित्य में कशापर्ण कहा गया है | 
*सिक्को पर लेख लिखने का प्रचलन सर्वप्रथम यवन शासक ने किया था | एक ऐसा भी सिक्का मिला है जिसपर समुन्द्र्गुप्त की विणा बजाते हुए तस्वीर है जिससे पता चलता है की समुन्द्र्गुप्त संगीत प्रेमी था |अर्कमदु ( पुडिचेरी के पास ) यंहा रोमन सिक्के प्राप्त हुए थे 
उस समय कागज़ी मुद्रा का प्रचलन नहीं था। परंतु धातु मुद्रा (सिक्का ) चलती थी। हड़प्पा काल में धातु मुद्रा की जगह मुहरो और मनकों का प्रचलन था जिससे व्यापार प्रणाली संचालित होती थी। वस्तुत: तांबे , चांदी, सोने और सीसे के सिक्को के साँचे बड़ी संख्या में मिले हैं। इनमे से अधिकांश साँचे कुषाण काल के प्राप्त हुए हैं। गुप्तोत्तर काल में ये साँचे लगभग लुप्त हो गए।

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