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Delhi election 2020: ये हैं कुछ ऐसी बातें.. जो अरविंद को बनाती हैं आम से खास

Delhi election 2020: ये हैं कुछ ऐसी बातें.. जो अरविंद को बनाती हैं आम से खास


अन्ना आंदोलन से देश के मीडिया में सुर्खियां बटोरने वाले अरविंद केजरीवाल कभी राजनीति का एक खास चेहरा बन जाएंगे... ये शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा...
वे न केवल राजनीति में आए, बल्कि उन्होंने राजनीति के दिग्गजों को पटखनी भी दी... आम आदमी पार्टी बनाकर उन्होंने देश की राजनीति को एक नया मोड़ दिया...

अरविंद केजरीवाल की छवि राजनीतिक रूप से साहसी नेता की भी बनकर उभरी. जब पहली बार अरविंद केजरीवाल दिल्ली विधानसभा का चुनाव लड़ रहे थे तब उन्होंने शीला दीक्षित के खिलाफ चुनाव लड़ा था. तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकीं शीला दीक्षित को अरविंद केजरीवाल ने 22 हजार वोटों से चुनाव हरा दिया... ये दिल्ली के चुनावी इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिक उलटफेरों में से एक रहा... इसके बाद अरविंद केजरीवाल ने 2014 में वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी चुनाव लड़ा था. हालांकि ये चुनाव अरविंद केजरीवाल हार गए...लेकिन राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को टक्कर देने की उनकी कला की तारीफ की जाती है.

आइए आपको बताते हैं कि अरविंद केजरीवाल की कुछ खास बातें जिनकी वजह से वे आम से खास बन गए... अरविंद केजरीवाल बेहतरीन संगठनकर्ता हैं... जी हां अन्ना आंदोलन पर्दे के पीछे सारी तैयारी अरविंद केजरीवाल ने ही की थी. भले ही उस मूवमेंट का चेहरा अन्ना हजारे थे... उस समय इंडिया अगेंस्ट करप्शन के तहत जितने भी लोग यूपीए सरकार के खिलाफ दिखाई दे रहे थे उन्हें अरविंद केजरीवाल ही एक मंच पर लेकर आए थे. आंदोलन को देशव्यापी रूप देने में भी अरविंद केजरीवाल की बड़ी भूमिका रही... इतना ही नहीं केजरीवाल एक बेहतरीन समन्वयक भी हैं.... केजरीवाल आम आदमी पार्टी के गठन के साथ ही उसके समन्वयक बनाए गए... 2012 में पार्टी के गठन के बाद ही दिल्ली में चुनाव हुए और पहले ही चुनाव में पार्टी 28 सीटें जीती थी.इसके बाद से लगातार केजरीवाल पार्टी के समन्वयक बने हुए हैं... केजरीवाल के नेतृत्व में पार्टी का विस्तार हुआ... दिल्ली और पंजाब में पार्टी की गहरी पैठ बनी... पंजाब के पहले ही चुनाव में आम आदमी पार्टी को शानदार सफलता हासिल हुई थी. पहले ही चुनाव में पंजाब से 22 विधायकों का जीतना अरविंद केजरीवाल सफलता माना गया.. वे वादों के भी पक्के माने जाते हैं.. मोहल्ला क्लीनिक समेत सीसीटीवी और सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के केजरीवाल के प्रयासों को सराहा गया... यह कहना भी गलत नहीं होगा कि उनमें ब्यूरोक्रेसी की समझ भी है... अरविंद केजरीवाल खुद एक आईआरएस अधिकारी रह चुके हैं. ऐसे में माना जाता है कि उन्हें ब्यूरोक्रेसी के भीतर की अच्छी समझ है. हालांकि दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने के बाद ब्यूरोक्रेसी के साथ उनका विवाद भी हुआ. मुख्य सचिव अंशू प्रकाश के साथ विवाद तो लंबे समय तक चर्चा में रहा. लेकिन माना जाता है कि इस विवाद के बाद अरविंद केजरीवाल ने अधिकारी वर्ग के साथ बेहतर तालमेल बनाकर काम करने की कोशिश की और शायद इसी का नतीजा है कि बीते साल ऐसे किसी विवाद की आहट नहीं सुनाई दी... एक और खासियत केजरवाल में है... वह यह कि वे अच्छे लेखक भी हैं
... साल 2009 में अरविंद केजरीवाल ने एक किताब लिखी थी जिसका नाम था स्वराज. इस किताब को महात्मा गांधी की किताब हिंद स्वराज के तर्ज पर लिखा गया था. इस किताब का केंद्रबिंदु यह था कि सत्ता का हस्तांतरण नई दिल्ली और राज्य की राजधानियों में बैठे कुछ लोगों के बजाए ग्राम सभा और मोहल्ला सभाओं में किया जाए. अरविंद केजरीवाल का मानना है कि इससे देश का विकास ज्यादा तेज और बेहतर दिशा में हो पाएगा.दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने के पहले अरविंद केजरीवाल की छवि बड़े सामाजिक कार्यकर्ता की रही है. उन्हें एशिया का नोबेल कहे जाने वाले रैमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है.



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