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Latest Update on Nirbhaya case। Supreme Court की Justice Bhanumati हुईं बेहोश, Hearing adjourned

Latest Update on Nirbhaya case। Supreme Court की Justice Bhanumati हुईं बेहोश, Hearing adjourned


निर्भया मामले में दोषियों को अलग-अलग फांसी पर चढ़ाए जाने की मांग करने वाली केंद्र की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस भानुमति को बेहोश हो गईं. बेंच सुनवाई को बीच में छोड़कर ही चली गई. फैसला लिखवाने से पहले जस्टिस भानुमति को चक्कर आए. पहले मुंह खोलकर बेचैनी भरी गहरी गहरी सांसें लीं, फिर कुर्सी पर ही गर्दन लुढ़क गई. जब तक लोग समझते और महिला स्टाफ संभालते तब तक वो होश में आ गईं. लगभग 20-30 सेकेंड बाद जस्टिस भानुमति होश में आ गईं. तीनों जज चेंबर में गए. सूत्रों के मुताबिक जस्टिस भानुमति चेंबर में भी कुछ सेकेंड के लिए बेहोश हुई. कहा जा रहा है कि उनको बुखार भी है और उनका रक्तचाप भी बढ़ा हुआ था. अब मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी.
इससे पहले सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के दोषी विनय की याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक निर्भया के दोषी विनय की मानसिक हालत बिल्कुल ठीक है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि ताजा मेडिकल रिपोर्ट कहती है कि दोषी विनय की न सिर्फ शारीरिक हालत ठीक है, बल्कि मानसिक हालत भी ठीक है.

दोषी विनय शर्मा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा दया याचिका खारिज करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. उसने मानसिक हालत ठीक नहीं होने की दलील दी थी. उसने यह भी आरोप लगाया था कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के सामने सभी दस्तावेज नहीं रखे गए थे. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने दोषी विनय की इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया. शीर्ष कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति के सामने सभी दस्तावेज रखे गए थे. जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस ए. एस. बोपन्ना की बेंच ने दोषी विनय की दलील को खारिज करते हुए कहा कि हमने सारी फाइलें देखकर विचार किया है. लिहाजा दोषी विनय की इस दलील को खारिज किया जाता है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उसके सारे दस्तावेज नहीं देखे. साथ ही यह दलील भी खारिज की जा रही है कि दिल्ली के उपराज्यपाल ने फाइल पर साइन नहीं किए थे. इससे पहले दोषियों के वकील ए. पी. सिंह ने दलील दी थी कि दिल्ली में विधानसभा चुनाव के दौरान डिजिटल साइन कैसे हो सकते हैं? वहीं, गुरुवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के दोषियों को फांसी देने के लिए डेथ वारंट जारी करने की मांग वाली याचिका पर 17 फरवरी तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी थी. कोर्ट ने कहा था कि निर्भया के दोषी आखिरी सांस तक कानूनी उपायों का इस्तेमाल करने के हकदार हैं और उनके मौलिक अधिकारों की अनदेखी नहीं की सकती. इसके साथ ही अदालत ने गुरुवार को निर्भया कांड के दोषी पवन गुप्ता की तरफ से पैरवी करने के लिए वकील रवि काजी को नियुक्त किया था. अब चारों दोषियों में से सिर्फ पवन गुप्ता के पास ही क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका दाखिल करने का विकल्प है. एडिशनल सेशन जज धर्मेद्र राणा ने कहा था, 'निर्भया के दोषी पवन के वकील को थोड़ा समय मिलना चाहिए, ताकि वो मुवक्किल का प्रभावी प्रतिनिधित्व कर सकें. खबर ये भी है कि पवन ने सरकारी के बजाए निजी वकील करने की इच्छा जताई है।

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