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3 मई के बाद भी कोरोना के केस बढ़ते रहे तो मोदी क्या आजीवन काल तक देश को बंद रखेंगे ?

3 मई के बाद भी कोरोना के केस बढ़ते रहे तो मोदी क्या आजीवन काल तक देश को बंद रखेंगे ?




आप लगता है अपने घर वालों से काफी परेशान है इतनी बेसब्री से लॉकडाउन के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं |
ऐसा कुछ भी लिखने से पहले हमें यह जान लेना आवश्यक है कि सरकार अपनी पसंद के मुताबिक देश में लॉकडाउन नहीं कर रही है, जैसा कि श्रीमती इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगाई थी जब उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर आ गया था |
सरकार को लॉकडाउन बढ़ाना पड़ रहा है ताकि इस बीमारी को और अधिक बढ़ने से रोका जा सके, और ऐसा नहीं है कि लॉकडाउन इसलिए बढ़ाया गया है क्योंकि पिछले 21 दिनों में भारत को इससे कोई फायदा नहीं हुआ है, परंतु लॉकडाउन को इसलिए बढ़ाया जा रहा है ताकि पिछले कुछ दिनों में जो हालात सुधरे हैं उन पर जल्दबाजी में कहीं पानी ना फिर जाए |
फ़र्ज़ कीजिये सरकार लॉकडाउन को हटा देती और शुरू में दो-तीन दिन सही रहने के बाद एकदम से देश में कोरोना के मामलो की बाढ़ आ जाती है तो क्या सरकार उसे संभल पाती ? और उस सूरत में भी आप सरकार को ही कोस रहे होंगे, जैसे की राहुल गाँधी जी पहले कह रहे थे देर से लॉकडाउन लगाया अब कह रहे हैं की बढ़ा क्यों रहे हैं ? मतलब चित्त भी अपनी पट्ट भी अपनी।
क्योंकि आप जैसे लोग अपनी जिम्मेदारी समझना ही नहीं चाहते, उन्हें लगता है कि सब कुछ सरकार की जिम्मेदारी है और सही मायने में देखा जाए तो यह सरकार की ही जिम्मेदारी है और सरकार अपनी जिम्मेदारी को निभाते हुए देश को तब तक लॉकडाउन में रखेगी जब तक ज़रूरी हो ताकि हमारे देश के हालात इटली और अमेरिका जैसे ना हो जाए |
क्योंकि अमेरिका और इटली स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में भारत से कई गुना आगे हैं, परंतु अभी कोरोना ने उनके भी पसीने छुड़ा रखे हैं, और भगवान ना करें अगर भारत में इसका एक चौथाई भी हो गया तो भारत सरकार के लिए इसे संभालना नामुमकिन हो जाएगा, इसलिए सरकार ऐसी कोई भी स्थिति आने से बचने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है | और लॉकडाउन को बढ़ाना भी उसी कड़ी में एक कदम है |
अंत में आप जैसे लोगों के लिए एक कहानी सुनाना चाहूंगा, तो गौर फरमाएगा ।
एक शहर जंगल के बहुत ही नजदीक था, उस शहर में आप जैसा एक समझदार व्यक्ति रहा करता था वह व्यक्ति रोज अपने घर से निकलता और एक रास्ते से होता हुआ अपने काम के लिए जाता, और वह जिस रास्ते का प्रयोग करता वह रास्ता जंगल से सटा हुआ था |
तो हुआ क्या एक बार उस जंगल में से एक आदमखोर शेर शहर में उस रास्ते के पास आकर रहने लगा | शुरु शुरु में तो उसने जानवरों को मारना शुरू किया और लोगों ने इस पर कुछ खास ध्यान नहीं दिया।
परंतु कुछ समय बाद वह शहर में घुसकर इंसानों पर भी हमला करने और कुछ इंसानों को उसने मार दिया, तो जैसे ही यह खबर प्रशासन को मिली उन्होंने वह रास्ता आम लोगों के लिए तब तक बंद कर दिया जब तक की शेर को पकड़कर काबू न कर लिया जाए, शुरू में विभाग ने इसके लिए 10 दिन का समय लिया |
परंतु शेर बहुत चालाक था वह शिकार करके झट से जंगल में भाग जाता था, प्रशासन की पूरी मेहनत करने के पश्चात भी हाथ नहीं आ रहा था तो 10 दिन जैसे ही खत्म हुए विभाग ने और आगे 10 दिनों के लिए उस रास्ते को बंद करने का नोटिस निकाला |
परंतु आप तो ठहरे समझदार आप के सर में खड़ा बाल था, आपने कहा कि आप प्रशासन की बात नहीं मानेंगे, क्योंकि उस रास्ते के बंद होने के कारण आपको एक लंबा रास्ता लेकर अपने कार्यालय जाना पड़ता था।
तो इसलिए आप प्रशासन की बात को नजरअंदाज करते हुए उसी रास्ते से चले जा रहे थे परंतु जैसे ही आपने आधा रास्ता पार किया तो आपने देखा शेर तो बीच सड़क पर आपके इंतजार में बैठा हुआ है उसे देखते ही आपको अपन सभी भगवान याद आ गए, और आपने कहा इस बार बचा ले भगवान् दोबारा इस और पैर करके सोऊंगा भी नहीं, पर अब कुछ नहीं हो सकता था,आपने बचकर भागने का बहुत प्रयास किया परंतु शेर तो ठहरा शेर उसने आप को मार कर ही दम लिया, और उसके बाद जंगल में चला गया।
अब आपके प्रियजन और परिवार वाले कहते फिर रहे थे कि कितना समझाया था कि उस रास्ते से मत जा शेर का खतरा है, पर नहीं माना और अपनी जान से हाथ धो बैठा, और हमें अकेला छोड़ कर चला गया |
अब आप स्वयं फैसला कीजिए कि क्या बेहतर था ?
कुछ और दिनों के लिए उस रास्ते का उपयोग ना करना या ज़िद में आकर उस रास्ते का उपयोग करके अपनी जान से हाथ धो बैठना फैसला मैं आपके ऊपर छोड़ता हूं |
यकीन मानिये कि सरकार पूरा प्रयास कर रही है की जल्द से जल्द हालात सामान्य हो सकें परन्तु यदि इसमें कोई भी जल्दबाज़ी की गयी तो लाखों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ सकता है।
जैसे की चीन ने जैसे ही अपने देश के उन प्रांतो को खोला जो की कोरोना से ग्रस्त थे, दोबारा से वहां पर हज़ारो की तादाद में केस आने लगे। तो अपनी सरकार पर भरोसा रखे और मान कर चलिए की जितना नुक्सान आपको इस लॉकडाउन से हो रहा है उसे से लाखों गुना ज्यादा नुक्सान सरकार का रोजाना हो रहा है। तो सरकार जल्द से जल्द हालत सामान्य करने का प्रयास कर रही है।
आपका तो पता नहीं परन्तु यदि मुझे इस वायरस से बचने के लिए 6 माह तक भी घर में बंद रहना पड़ा तो रहूँगा क्यूंकि जान है तो जहान है और अपनी मूर्खता के कारण में अपने परिवार को बेसहारा छोड़ने की गलती नहीं करूँगा । आपकी अपनी मर्ज़ी है आपको आज केवल एक माह के लिए बाहर घूम कर मर जाना है या कुछ माह घर में बंद रहकर अपने परिवार का पालन पोषण करना है ।
क्यूंकि अभी भी आप जैसे लोगों की कमी नहीं है जो लॉकडाउन के बावजूद भी बाहर घूम रहे हैं उन जैसे लोगों के लिए केवल एक कहावत है "अब पछतात होत क्या, जब चिड़िया चुग गयी खेत"
आप यह सवाल उन लोगों के घर पर जाकर पूछे जिन्होंने अपने प्रियजनों को इस वायरस के कारण खो दिया है, अगर भगवन आज उन्हें मौका दे तो वे एक वर्ष तक घर में बैठने को तैयार होंगे अगर उनके अपने वापिस आ जाए तो।
परन्तु वह कहावत है न की कुछ लोगों को ठोकर खाकर ही समझ आता है, तो ऐसे लोगों की हमारे देश में कमी नहीं है।





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