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लॉकडाउन के चलते जो गरीब मजदूर अपने घर नहीं पहुंच सकें है क्या वे अगले चुनाव मोदी विरोधी वोटर होकर सामने आ सकते हैं?

लॉकडाउन के चलते जो गरीब मजदूर अपने घर नहीं पहुंच सकें है क्या वे अगले चुनाव मोदी विरोधी वोटर होकर सामने आ सकते हैं?

जो मजदूर लॉकडाउन के चलते अपने घर नही पहुंच सके वे अगले चुनावों में मोदी का विरोध करेंगे इस पर तो अभी कुछ नही कहा जा सकता लेकिन एक बात जरूर कही जा सकती है कि उनको भरमाकर और उनको भड़काकर जरूर कोरोना वायरस के खिलाफ की जा रही लड़ाई को कमजोर किया जा रहा है।
SOURCE - GOOGLE
दो बातें समझने की हैं।
पहली यह कि लॉकडाउन का मतलब यह है कि जो जहां पर है वह वहीं पर रुके ताकि वायरस फैलने की किसी भी संभावना को रोका जा सके। लॉकडाउन किसी रोमांच के लिए,किसी आनन्द के लिए नहीं किया गया था बल्कि स्थिति की भयावहता को देखते किया गया था,जब लगा अगर लोग घरों से बाहर निकलेंगे तो इस महामारी का फैलना तय है। जब सोशल डिस्टेंसिङ्ग की बात हो रही थी तब प्रवासी मजदूरों ने झुंड बनाकर बाहर निकलकर इस कदम को फेल कर दिया। उनसे ज्यादा अपराध मीडिया ने किया जब उन्होंने मुख्य समस्या की गम्भीरता पर ध्यान देने के बजाय इसको सुर्खियों मेंT देना शुरू किया इससे जो मजदूर घरवापसी की योजना नही भी बना रहे थे वे भी घरों से निकलने लगे और इससे व्यवस्था ध्वस्त हो गई। यह सिलसिला अभीतक नहीँ रुक और मुम्बई और गुजरात में यह नजर आ रहा है।
दूसरी मुख्य बात यह है कि आज फसल कटाई के लिए खड़ी है लेकिन मजदूरों की वापसी से फसल खड़ी है,आज मजदूरों की जरूरत है। अभी शायद 20अप्रैल के बाद सीमित संख्या में कामकाज शुरू हो सकता है तो अगर इन मजदूरों को वापस जाने दिया होता तो बीमारी फैलने के अलावा वर्कफोर्स का अभाव भी हो जाता जिससे उद्योगों को दुबारा शुरू करना मुश्किल हो जाता।
ये जो मजदूर हैं वे कोई इतने अमीर नही हैं कि अपने घरों में जाकर अपना जीवनयापन कर सकें और न ही ग्रामीण क्षेत्रों में इतनी चिकित्सा सुविधा है कि बीमारी की हालत में इनका इलाज हो सके।
कल्पना कीजिए एक तरफ तो पूरी दुनिया इस बीमारी से बचने के लिए एकदूसरे से दूरी बनाए रखने का एकमात्र उपाय मान रहा है और वहीं अगर ये लोग रेल बसों में ठूंस ठूंस कर घर वापसी करते तो अबतक देश में जितने भी इस बीमारी से बचे स्थान हैं वे भी इसकी चपेट में आ जाते।
कल परसों मुम्बई और गुजरात की घटनाओं को देखकर लगता है इस देश में कोई न कोई शक्ति है जो भारत में इस महामारी को फैलाना चाहती है,वे नही चाहते कि भारत इस बीमारी से मुक्त हो,देश आगे बढ़े।

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