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क्या कारण है कि ताजमहल को ही सात अजूबों में शामिल किया गया है? क्या भारत में उससे अद्भुत और आश्चर्यकारी कुछ नहीं है?

आप आश्चर्य करेंगे कि भारत में मूर्तिकला इतने उच्च स्तर पर थी कि उसके सामने ताजमहल शून्य के बराबर है।

अकेला कर्नाटक में बेलूर का चेन्नकेशव मंदिर का स्थापत्य और मूर्तिकला इतनी उत्कृष्ट है कि कल्पना नही की जा सकती कि सचमुच हजार साल पहले भारत इस मामले में इतना विकसित रहा होगा।

सोचिए कि औरंगाबाद का कैलाश मन्दिर सिर्फ एक चट्टान से बना है। इसका निर्माण शिखर से शुरू होकर तहखाने तक हुआ।

भारत में एक से एक अद्भुत मन्दिर हैं लेकिन आज़ादी के बाद सांस्कृतिक,ऐतिहासिक संस्थाओं पर वामपंथियों का कब्जा हो गया,जो हिन्दू विरोधी थे,उन्होंने हिन्दू धर्म के प्रति अपनी घृणा के चलते इन्हें विश्व के सामने या देश के सामने आने नही दिया।

चेन्नकेशव मन्दिर बेलूर।

होयसालेश्वर मन्दिर हलेबीड़ू कर्नाटक।

कैलाशा मन्दिर,एलोरा महाराष्ट्र।

यह मंदिर एक ही चट्टान से बना है।

वेंकटेश्वर मन्दिर तिरुमला, आंध्र प्रदेश।

मीनाक्षी मन्दिर तमिलनाडु।

मीनाक्षी मन्दिर की बेहतरीन कलाकारी।

विरुपाक्ष मन्दिर हंपी।

चेन्नकेशव मन्दिर की मूर्तिकला।

यह भी

यह भी चेन्नकेशव मन्दिर की कारीगरी का नमूना है।

रामेश्वरम मंदिर।

हलेबीड़ू मन्दिर, कर्नाटका।

ये कुछ ही मन्दिर हैं जो अपनी अद्भुत मूर्तिकला के लिए जाने जाते हैं।

ऐसे हजारों मन्दिर हैं जो श्रद्धालुओं की नजरों से ओझल हुए हैं।

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