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अगर भारत पीओके की तरफ कोई कदम उठाता है तो CHIN भारत के खिलाफ कैसी रणनीति अपना सकता है ?

 अगर भारत पीओके की तरफ कोई कदम उठाता है तो CHIN भारत के खिलाफ कैसी रणनीति अपना सकता है ?

यह लड़ाई सामरिक कम और राजनैतिक ज्यादा होने वाली है। POK के प्रति भारत का बदलता रवैया राजनैतिक रूप से अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रति कदम है।


पिछले 70सालों से कश्मीर ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बहस के केंद्र में है जबकि कानूनन गिलगित बाल्टिस्तान भी भारत का हिस्सा है लेकिन इस दौर में भारत को कभी इसकी याद नही आई।पाकिस्तान के पास अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारत के खिलाफ विषवमन करने के लिए कश्मीर एक मुद्दा रहा है और अप्रत्यक्ष रूप से चीन उसका सहायक रहा है।चीन और पाकिस्तान भारत के दुश्मन रहे हैं और इनकी सांठगांठ अटूट रही है।पाकिस्तान में बैठे आतंकियों को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कराने की राह में चीन ने हमेशा अड़ंगा डाला है।

अब स्थिति यह है कि जिस गलगित बाल्टिस्तान पर भारत ने अब दुबारा अपना दावा ठोका है उसका एक हिस्सा पाकिस्तान ने चीन को बेचा हुआ है। कल अगर अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं में यह विवाद उठता है तो चीन एक रैफरी की हैसियत में न होकर एक पार्टी के रूप में खड़ा होगा जिससे उसकी विश्वसनीयता कम होगी।चीन किसी भी देश के सीमा विवाद में अपने सदियों पुराने नक्शे,दस्तावेज और संधियों के दस्तावेज प्रस्तुत करता है आज भारत ने जो अपना हक जमाया वह सदियों पुराना नही बल्कि महज 70 साल पुराना है।

कल के दिन अगर भारत पाकिस्तान के बीच समझौते की बात होती है तो मामला सिर्फ कश्मीर तक नही रहेगा बल्कि पूर्ण कश्मीर रियासत के आधिपत्य पर होगा।जरूर चीन भी इसमें एक पार्टी बनेगा और वह पाकिस्तान का पक्ष लेगा लेकिन उसका दावा मजबूत नही होगा।

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