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HISTORY OF MUGHAL EMPEROR मुगल साम्राज्य के इतिहास

HISTORY OF MUGHAL EMPEROR मुगल साम्राज्य के इतिहास 

बाबर

जहीरुद्दीन बाबर का जन्म 24 फरवरी 1483 में फरगना में हुआ था। बाबर के चार पुत्र थे - हुमायूँ, कामरान, अस्करी तथा हिन्दाल। बाबर ने भारत पर पहला आक्रमण ई. युसुफजाईयों के विरुद्ध किया परन्तु उसका प्रथम महत्वपूर्ण आक्रमण 1526 ई. में हुआ।

बाबर भारत में मुगल वंश का संस्थापक था। वह मध्य एशिया स्थित फ़रगना का शासक था। बाबर के पिता का नाम उमरशेख मिर्जा तथा माता का नाम कुतलुगनिगार खानम था। बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध (1526) ई में इब्राहिम लोदी को हराकर भारत में मुग़ल वंश की स्थापना की।

बाबर की मृत्यु 1530 ई. में आरामबाग आगरा में हुई। अकबर ने बाबर का मकबरा आगरा से काबुल स्थानांतरित करवाया। बाबर अपनी उदारता के कारण कलंदर नाम से प्रसिद्ध था। बाबर ने मुबइयान नामक पद्य शैली का विकास किया।

हुमायूँ

नसीरुद्दीन हुमायूँ दिसंबर, को आगरा में वर्ष की अवस्था में सिंहासन पर बैठा। दिल्ली की गद्दी पर बैठने से पहले हुमायूँ बदख्शां का सूबेदार था।

हुमायूँ ने राज्याभिषेक के बाद अपना राज्य अपने तीन भाइयों में बाँट दिया जो राजनीतिक दृष्टि से उसकी सबसे बड़ी भूल थी।

हुमायूँ ने दिल्ली के निकट दीन पनाह नगर की स्थापना की।

हुमायूँ द्वारा लड़े गए चार प्रमुख युद्धों का क्रम है - दौराहा या दौहरिया (1532 ई.), चौसा (1539 ई.), बिलग्राम (1540 ई.), एवं सरहिंद का युद्ध (1555 ई.)।

हाजी बेगम ने दिल्ली में हुमायूँ का मकबरा बनवाया। हुमायूँ की सौतेली बहन गुलबदन बेगम ने हुमायूँनामा की रचना की।

सूर वंश

शेरशाह सूरी ने हुमायूँ को चौसा के युद्ध (1539 ई.) तथा कन्नौज के युद्ध (1540 ई.) में हराकर 1540-1545 ई.तक तक भारत पर शासन किया।

शेरशाह का असली नाम फरीद था। उसे शेर खां की उपाधि बहार खां लोहानी ने दी थी। चौसा के युद्ध में विजय के बाद उसने शेरशाह की उपाधि ग्रहण की।

शेरशाह के शासनकाल में मालिक मुहम्मद जायसी ने पद्मावत की रचना की थी।

शेरशाह सूरी ने सिंधु नदी से बंगाल तक शेरशाह सूरी मार्ग का निर्माण करवाया था। शेरशाह का मकबरा सासाराम में स्थित है। शेरशाह ने सर्वप्रथम काजी फजीलात को अमीन-ए-बंगाल अथवा आमिर-ए-बंगाल नियुक्त किया।

अकबर (1556-1605 ई.)

अकबर का जन्म 1542 ई. में हुमायूँ के प्रवास के दौरान, अमरकोट में राणा बीरसाल के महल में हुआ। अकबर की माँ का नाम हमीदाबानो बेगम था।

अकबर का राज्या भिषेक 1556 ई. में कलानौर में हुआ। 1560 ई. तक अकबर ने बैरम खां के संरक्षण में शासन किया। बैरम खां को वकील नियुक्त किया गया था।

सिंहासन पर बैठते ही अकबर ने बैरम खां की सहायता से 1556 ई. में पानीपत के द्वितीय युद्ध में हेमू विक्रमादित्य को पराजित किया।

1576 ई. के हल्दीघाटी के प्रसिद्ध युद्ध में अकबर के सेनापति राजा मानसिंह ने मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप को पराजित किया। बुलंद दरवाजा अकबर द्वारा गुजरात जीतने के उपलक्षय में बनवाया गया था। अकबर ने फतेहपुर सीकरी में धार्मिक परिचर्चाओं हेतु इबादतखाने की स्थापना 1575 ई. में की।

जहांगीर (1605-1627 ई.)

इसके बचपन का नाम सलीम था, उसने नूरुद्दीन की उपाधि धारण की। सिंहासन पर बैठते ही जहांगीर के पुत्र खुसरो ने विद्रोह करवा दिया, जिसे जहांगीर ने पकड़वाकर अँधा करवा दिया।

जहांगीर ने सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव को शहजादा खुसरो की सहायता करने के कारण फांसी की सजा दी। जहांगीर ने 1611ई. में शेर-ए-अफगान की विधवा मेहरून्निसां से विवाह किया जो बाद में नूरजहां के नाम से प्रसिद्ध हुई। जहांगीर ने अकारिजा के नेतृत्व में आगरा में एक चित्रशाला की स्थापना की। नूरजहां की माँ अस्मत बेगम ने गुलाब से इत्र निकलने की विधि खोजी थी।

जहांगीर ने फ़ारसी में अपनी आत्मकथा तुजुक-ए-जहांगीर की रचना की। 1627 ई. में जहांगीर की मृत्यु हो गई। जहांगीर के मकबरे का निर्माण नूरजहां ने लाहौर के निकट शाहदरा नमक स्थान पर करवाया।

शाहजहां (1627-1658 ई.)

शाहजहां जोधपुर के शासक उदय सिंह की पुत्री जगत गोसाई का पुत्र था। इसके बचपन का नाम खुर्रम। अहमदनगर के वजीर मलिक अंबर के विरुद्ध सफलता से खुश होकर जहांगीर ने खुर्रम को शाहजहां की उपाधि प्रदान की।

इसका विवाह नूरजहां के भाई आसफ खां की पुत्री अर्जुनमन्दबनो बेगम से हुआ, जो मुमताज महल के नाम से प्रसिद्ध हुई। जहांगीर के सबसे छोटे बेटे शहरयार का विवाह नूरजहां के पहले पति से उत्पन्न पुत्री से हुआ।

शाहजंहा ने आसफखां की सहयता से सिंहासन पर अधिकार कर लिया। इसके समय में ख़ानेजहाँ लोदी का विद्रोह हुआ एवं कंधार मुगलों के हाथ से निकल गया।

शाहजहां ने दिल्ली के निकट शाहजहांनाबाद नगर की स्थापना की और आगरा से राजधानी इस स्थान पर परिवर्तित की। इसे आजकल पुराणी दिल्ली के नाम से पुकारा जाता है।

इसी में सुरक्षा दुर्ग का निर्माण कराया, जिले लाल किला या किला या किला- ए-मुबारक के नाम से जाना जाता है।

उसने स्वंय अपना व अपनी बेगम मुमताज महल का मकबरा आगरा में बनवाया, जो ताजमहल के नाम से प्रसिद्ध है।

ताजमहल के निर्माण में 20 वर्ष का समय लगा। इसका निर्माण कार्य 1632 ई. में आरम्भ हुआ था। 1666 ई. में शाहजहां की मृत्यु वर्ष कैद में रहने के बाद हो गई।

औरंगजेब (1658-1707 ई.)

औरंगजेब का जन्म नम्बर, को उज्जैन के दोहद नामक स्थान पर हुआ था। सिंहासन पर बैठने से पहले यह दक्कन का गवर्नर था।

औरंगजेब आलमगीर के नाम से सिंहासन पर बैठा।

उसने दो बार अपना राज्याभिषेक करवाया था। सम्राट बनने के उपरांत औरंगजेब ने जनता के आर्थिक कष्टों के निवारण हेतु राहदारी और पानदारी। आदि करों को समाप्त कर दिया।

औरंगजेब ने अपनी बेगम के आग्रह पर ताजमहल की प्रकृति का निर्माण किया, जिसे बीबी का मकबरा या द्वितीय ताजमहल के नाम से जाना जाता है। यह औरंगाबाद में स्थित है। औरंगजेब की मृत्यु ई. में हुई। इसे दौलतबाद में स्थित फकीर बुहानुद्दीन की कब्र के अहाते में दफनाया गया।

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